शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जनजातीय व क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई लागू करने की अनुशंसा का प्रतिवेदन सौंपा। अनुशंसा में कहा गया है कि सभी स्कूलों के पोषक क्षेत्रों में भाषायी सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। छात्रों की संख्या के आधार पर, प्रत्येक विद्यालय में “शिक्षा का माध्यम’ निर्धारित होना चाहिए। माध्यमिक विद्यालयों के लिए “शिक्षा का माध्यम’ अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग-अलग सेक्शन के रूप में होना चाहिए। प्रतिवेदन में जेसीईआरटी में शिक्षाविदों को नियुक्त करने की भी अनुशंसा की गई है, जो सभी कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम और कोर्स तैयार करेंगे। जेसीईआरटी, पुस्तकों के अनुवाद के लिए विश्वविद्यालयों के भाषा विशेषज्ञों की मदद ले सकता है। हालांकि, दीर्घावधि में राज्य सरकार को 10 लाख और उससे अधिक आबादी द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं के लिए अपनी अकादमी स्थापित करनी चाहिए। शिक्षकों की रिक्तियों को भाषावार विज्ञापित किया जाना चाहिए। शिक्षकों की भर्ती के पात्रता मानदंड में एक शर्त जोड़ने की भी सिफारिश की गई है। उस अनुसार, अभ्यर्थी ने जिस माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के लिए आवेदन कर रहा है, उसमें “शिक्षा का माध्यम’ भाषा का अध्ययन होना चाहिए। क्षेत्रीय भाषाओं पर अध्ययन करने बंगाल गई थी टीम शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई लागू करने के उद्देश्य से विभागीय सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित हुई थी। निदेशक, प्राथमिक शिक्षा और विभाग के संयुक्त सचिव सहित कई वरीय पदाधिकारी क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई का अध्ययन करने के लिए बंगाल गए थे। इस टीम की अनुशंसा को अग्रेतर कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपी गई है।


