पूर्व वक्फ बोर्ड चेयरमैन बोले- आज वक्फ बोर्ड काफी कमजोर:मुतवलियों की मनमानी चल रही हैं; सुधार के लिए जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी को दिए सुझाव

जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल की ओर से पूर्व अध्यक्ष वक्फ बोर्ड राजस्थान को प्रतिनिधि मंडल राजस्थान के साथ वक्फ संशोधन बिल 2024 के पक्ष में अपनी बात रखने के लिए पार्लियामेंट एनेएक्स नई दिल्ली में बुलाया गया। सैयद अबूबकर नकवी ने राजस्थान के 21 सदस्यों को प्रतिमंडल मंडल में शामिल करते हुए राजस्थान के अलग-अलग संभागों से प्रतिनिधियों को साथ लेकर दिल्ली पहुंचे और ‘वक्फ संशोधन बिल 2024’ के पक्ष में 19 दिसंबर के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने बताया- 1995 में वक्फ अधिनियम बना था, उसका संशोधन 2013 में इस लिए किया गया था क्योंकि सच्चर कमेटी ने यह बता दिया था कि हिंदुस्तान के मुस्लमानों की बद से बदतर हालत है। लेकिन 2013 में भी इतनी कमियां रखी गई, जिससे आज वक्फ बोर्ड काफी कमजोर है। उसमें भ्रष्टाचार बना हुआ है, उसमें मुतवलियों की मनमानी चल रही हैं। जिसके कारण गरीब बहनों बच्चों को किसी तरीके से मदद नहीं मिल पा रही है। वक्फ संशोधन बिल लाया जा रहा है। हमने जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी को अपने सुझाव दिए है। हम इस बिल के साथ है। हमने सुझाव दिया कि वक्फ संशोधन बिल 2024 में बोर्ड से सर्वेक्षण अधिकारी को भिजवा कर कोर्ट द्वारा आदेशित जमीनों को खाली करवाने का जो अधिकार था वह अब कलेक्टर, एसडीम या उनके द्वारा नियुक्त प्रशासनिक अधिकारी को भेजा जाता है तो जमीन को खाली करवाने में बहुत आसानी रहेगी। वक्फ अधिनियम 1995 में कई कमियां जानबूझकर कांग्रेस सरकार ने छोड़ा उन्होंने बताया- वक्फ अधिनियम 1995 में कई कमियां जानबूझकर कांग्रेस सरकार ने छोड़ा। जिससे मुस्लिम को पिछड़ा, अशिक्षित, दलित से भी बुरी हालत में रखने का जानबूझकर भरपूर प्रयास किया। उसके बाद इसी सरकार ने सच्चर कमेटी गठित की ताकि जानकारी हो सके की हिंदुस्तान का मुस्लिम किस स्थिति में रह रहा है। सच्चर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट देकर स्पष्ट कहा कि देश में मुसलमानो के हालत दलित से भी खराब है, बुरी है, इसलिए इस समाज के लिए अधिक को अधिक लाभ दिया जाकर गरीबी रेखा से ऊपर उठाना आवश्यक है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात रही कि 2013 में इसी कांग्रेस सरकार ने वक्फ संशोधन बिल 2013 संशोधित किया। सच्चर कमेटी ने इतना लिखने के बाद भी मुसलमानों के लिए इस बोर्ड में या अलग तरीके से लाभ पहुंचाने में रुचि नहीं रखी। मुसलमान के 90-95 प्रतिशत देश में वोट लेकर भी इस समाज को वोट बैंक के रूप में ” बंधुआ मजदूर” बनाए रखा। उन्होंने बताया- वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार द्वारा देश को विश्व गुरु बनाने के लिए मुस्लिम समाज को भी गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का काम शुरू किया। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ नारे के साथ मुस्लिम बहनों को ट्रिपल तलाक बिल पास करवाकर खुशी दी, तो कश्मीर के लोगों को 370 हटाकर वहां रोजगारों के लिए कारखाने और बच्चों के लिए यूनिवर्सिटी बनाकर शिक्षा दिलवाने का रास्ता बनाया। इसी तरह वक्फ संशोधन बिल 2024 भी लाकर, अब जायदातों के लिए वक्फ बोर्ड को मजबूत करने का बिल सदन में पेश किया है। जिसे आजकल जगदंबिका पाल को जॉइंट पार्लियामेंट कमेटी का अध्यक्ष बनाकर करीब 40 सदस्यों की पार्लियामेंट्री कमेटी बनाई है जो देश के अलग-अलग मुस्लिम समाज के, अलग-अलग प्रदेशों, अलग-अलग मुस्लिम संगठनों, मुस्लिम बुद्धिजीवियों, एक्स वाइस चांसलर, प्रोफेसर, आदि जिम्मेदारों को बुलवाकर सुनवाई कर रहे हैं। इसी तरह बोर्ड में दो सनातनी भाई (हिंदू भाइयों को भी सदस्य के रूप में इस बोर्ड में रखते हैं तो उचित रहता है क्योंकि वक्फ की दुकाने या ऑफिसेज 50% से भी अधिक सनातनी भाई (हिंदू भाइयों) के पास है। यदि किसी प्रकार का वाद प्रतिवाद होता है तो पूरे बोर्ड में मुस्लिम समुदाय के मेंबर और अध्यक्ष और सेक्रेटरी, विधायक, सांसद होने के नाते वह किराएदार अपने आप को असहाय महसूस करता है यदि सनातनी भाई भी बोर्ड में सदस्य होगा तो उचित रहेगा। इसी प्रकार बोर्ड के कोर्ट निर्णय में अधिक समय लग जाता है तो सीधा ही हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में जाने से न्याय में पारदर्शिता होगी। उन्होंने बताया- संशोधन बिल 2024 में कमेटी, जायदादो द्वारा दी जाने वाली 7% राशि को कम करके इस बिल में 5% की गई है , इससे कमेटी को राशि देना आसान रहेगा और सभी वक्फ कमेटियां समय पर अपनी राशि दे सकेगी। इसी प्रकार 44 बिंदुओं के मुख्य मुख्य बिंदुओं पर हमने जो अपनी राय रखी। नई दिल्ली पार्लियामेंट्री कमिटी में प्रतिनिधि मंडल में रेशमा हुसैन, इरशाद अली, मोहम्मद सलीम छीपा, अब्दुल अजीज, अहसान अंसारी, फजल रहमान, मुन्ना भाई, सलीम खान, महफूज अली, आबिद हुसैन, शहजाद अली, आदि शामिल शामिल हुए। वहीं इस प्रेस कांफ्रेंस में रेशमा हुसैन, मोहम्मद हनीफ, इरशाद अली, इमरान पठान, अब्दुल अजीज, सादिक (मुन्ना भाई), फजले रहमान मौजूद रहे।

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