गलाडा में पिछले कुछ महीनों से भ्रष्टाचार का नया खेल बढ़ गया है। बिना असली अलॉटियों के, जाली दस्तावेज तैयार कर एनओसी जारी की जा रही है और फ्लैट बिक रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जब असली खरीदार या अलाटी गलाडा के दफ्तर पहुंचता है, तब जाकर सच्चाई सामने आती है। अब तक ऐसे 6 अलॉटी सामने आ चुके हैं। लेकिन, उन्हें इंसाफ नहीं मिलता। क्योंकि, जब कार्रवाई की बात आती है तो फाइलें इस ब्रांच से ब्रांच घूमती रहती हैं और शिकायतकर्ता अफसरों के चक्कर लगाता रहते हैं। यह गोरखधंधा कुछ एजेंटों की मिलीभगत से चल रहा है। ये एजेंट दिनभर गलाडा के दफ्तर में अफसरों के आसपास ही नजर आते हैं। शिकायतकर्ताओं ने भास्कर को बताया कि जो अफसर इस घोटाले में शामिल हैं, वो ही अब जांच अटका रहे हैं। क्योंकि, अगर जांच हुई तो वो ही दोषी पाए जाएंगे। ये सिर्फ वो केस, जिनमें शिकायतकर्ता खुद गलाडा पहुंचे हैं {दुगरी फेज-3: मकान नंबर 273 और 274… जाली एनडीसी से बिका रिफंड फ्लैट: गलाडा के इन फ्लैट्स की रजिस्ट्री जाली नो ड्यूज सर्टिफिकेट (एनडीसी) के जरिए कराई गई। लेकिन, जब शिकायतकर्ता गुरजीत सिंह ने 28 अगस्त 2024 को इसकी शिकायत एस्टेट अफसर को दी, तब जाकर खुलासा हुआ कि वह फ्लैट तो पहले ही रिफंड हो चुका था। बावजूद इसके आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। {सेक्टर 40: फ्लैट नंबर 947… जाली डेथ सर्टिफिकेट से पावर ऑफ अटॉर्नी की: अलाटी के फर्जी डेथ सर्टिफिकेट के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर विपन कुमार नाम के व्यक्ति को फ्लैट बेच दिया गया। इसका असली अलाटी एनआरआई है। एनआरआई के बेटे ने शिकायत पर एनआरआई थाने में कराई। जहां समझौता करवा कर मामला निपटा दिया गया। लेकिन, इसकी शिकायत गलाडा में भी पेंडिंग थी। एस्टेट अफसर डॉक्टर अमन गुप्ता ने पुलिस कमिश्नर को केस दर्ज करने की सिफारिश की है। {सेक्टर 40: फ्लैट नंबर 907… मृत अलाटी के नाम पर फर्जी आधार व लाल कार्ड: ये मामला और भी चौंकाने वाला है। अलाटी का निधन 2012 में हो चुका है। लेकिन, गलाडा दफ्तर में मौजूद एजेंटों ने उसी नाम का दूसरा व्यक्ति खड़ा कर फर्जी आधार कार्ड और लाल कार्ड बनवा दिया। उसके बाद इस फ्लैट का अलॉटमेंट कराया गया। फिर पावर ऑफ अटॉर्नी बनाकर फ्लैट किसी और को बेच दिया गया। इस मामले की फाइल गलाडा दफ्तर से गायब कर दी गई है। {सेक्टर 40: फ्लैट नंबर 905… बिना भुगतान के बना एनडीसी, फिर बिक्री: इस फ्लैट के अलाटी ने कभी पैसे जमा नहीं करवाए थे, फिर भी एनडीसी बनाकर पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए फ्लैट बेच दिया गया। बाजार में ये फ्लैट 30 लाख रु. में बिक रहे हैं। गलाडा में शिकायत लंबित है, कार्रवाई अब तक शून्य। {अर्बन एस्टेट, ढंडारी कलां: प्लॉट नंबर 910… 2 करोड़ का खेल: 250 गज का प्लॉट, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ रु. के करीब है। इसे जाली दस्तावेजों के जरिए बेचा गया। फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाकर यह सौदा किया गया। {दुगरी फेज-3: मकान नंबर 275… वही पुराना फॉर्मूला, नई बिक्री: यहां भी अलाटी के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एनओसी जारी की गई और फ्लैट बेचा गया। फाइलें आज भी बिना जांच के धूल फांक रही हैं। जांच की बात आई तो फाइलें गायब, अफसरों के पास जवाब नहीं अफसरों-एजेंटों के गठजोड़ से हो रहे घोटाले शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे महीनों से गलाडा अधिकारियों से जवाब पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सभी अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों के कार्यकाल में ये घोटाले हुए, उन्हीं के हवाले जांच सौंपी जा रही है। जब गलाडा के सीए संदीप कुमार से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने कहा कि एस्टेट अफसर डॉक्टर अमन गुप्ता से बात करें। डॉक्टर अमन गुप्ता ने जवाब में कहा कि चार्ज तो सुपरिंटेंडेंट पंकज कालिया के पास है। पंकज कालिया बोले- मुझे तो चार्ज लिए अभी दस दिन हुए हैं और तब से यही फाइल ढूंढ रहा हूं। आप एसओ से पूछो। जब सेक्शन अफसर रोहित से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि अभी कुछ दिन पहले चार्ज मिला है, सीनियर असिस्टेंट शिंगारा से पूछो। शिंगारा ने कहा कि एसओ जसकिरण कौर से बात कर लीजिए। एसओ जसकिरण कौर से संपर्क करने की कोशिश की गई, उन्होंने फोन नहीं उठाया। आखिर में अकाउंट ब्रांच के एसओ राजकुमार से बात हुई, तो उन्होंने बताया कि तीन फाइलें जांच के लिए आई हैं और दस्तावेज चेक किए जा रहे हैं। बाकि फाइलों की जानकारी नहीं है।


