रायपुर के ट्रैफिक-DSP बने शॉर्ट फिल्म में हीरो; VIDEO:मसल्स दिखाए, मालवाहक में जा रही बारात को रोका, रोड-सेफ्टी का दिया मैसेज

रायपुर के ट्रैफिक DSP छत्तीसगढ़ी शॉर्ट फिल्म में हीरो बने हैं। यह शॉर्ट फिल्म पुलिस ने रोड सेफ्टी जागरूकता का मैसेज देने के लिए बनाई है। जिसमें DSP ने क्लाइमेक्स के सीन में एक मालवाहक गाड़ी में जा रही एक बारात को रोक दिया। जिसके बाद बारात सवारी गाड़ी में आगे बढ़ी। इस शॉर्ट फिल्म DSP ने अपने हैवी मसल्स भी दिखाए हैं। दरअसल, यह शॉर्ट फिल्म मालवाहक गाड़ियों में लोगों को बैठने से रोकने के लिए बनाई गई है। बीते हफ्ते ही खरोरा में एक मालवाहक गाड़ी का ट्रेलर से टकराकर एक्सीडेंट हो गया। ये लोग छठी कार्यक्रम से लौट रहे थे। हादसे में 13 लोगों की जान चली गई। जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस समेत जिला प्रशासन आउटर के ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चला रहा है। जिसमें मालवाहक ड्राइवर संघ की बैठक समेत लोगों के बीच जाकर जागरूक करना शामिल है। DSP ने निभाया गंगुआ का कैरेक्टर इस फिल्म में रायपुर ट्रैफिक DSP सतीश ठाकुर ने गंगुआ नाम के व्यक्ति का किरदार निभाया है। जो गांव में रहने वाला एक किसान है। उसे गांव की एक बारात में जाने के लिए निमंत्रण आता है। बारात ट्रैक्टर और मालवाहक गाड़ी में जा रही थी। तब गंगुआ इसका विरोध करता है। वह बताता है कि मालवाहक गाड़ी में सवार लोगों की जान को हमेशा खतरा बना रहता है। इसके अलावा ये नियमों के खिलाफ भी है। फिल्म ने दिखाई मसल्स इस शॉर्ट फिल्म में DSP ठाकुर ने गांव के एक किसान की तरह लुंगी पहने हुए हैं। इस दौरान उनकी हैवी मसल्स भी दिखाई दे रही है। दरअसल ठाकुर असल जीवन में भी काफी फिट है। वह बीते 25-30 सालों से एक्सरसाइज कर रहे है। उनका कहना है कि पुलिस कर्मियों के लिए शारीरिक रूप से फिट होना बहुत जरूरी है। इसके अलावा एक्सरसाइज करना और फिटनेस का ख्याल रखना उनकी हॉबी भी है। SSP बोले- नियमों का पालन करें जागरूकता के लिए बनी इस शॉर्ट फिल्म में रायपुर SSP डॉ लाल उमेद सिंह भी है। उन्होंने सभी मालवाहक ड्राइवर को नियम भी बताया है। जिसमें मालवाहक गाड़ियों में सवारी न बैठने की चेतावनी भी दी है। आगे उन्होंने कहा कि ड्राइवर को समस्त दस्तावेज लाइसेंस, बीमा, आर.सी. बुक, प्रदूषण प्रमाण पत्र, परमिट, फिटनेस आदि वाहन में ही रखना चाहिए। हर साल औसतन डेढ़ लाख लोगों की मौत बता दें कि, भारत में हर साल सड़क दुर्घटना में लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। जिसका बड़ा कारण घायलों को जल्द मेडिकल फैसिलिटी उपलब्ध नहीं होना है। सड़क दुर्घटना के दौरान 30 मिनट का समय गोल्डन आवर कहलाता है। इस दौरान अगर घायल व्यक्ति को हॉस्पिटल पहुंचा दिया जाए या फिर उसे मेडिकल सहायता मिल जाए, तो जान बच सकती है। हालांकि अधिकांश रोड एक्सीडेंट में लोग सोचते हैं कि बार-बार पेशी में जाना पड़ेगा। पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, जिससे परेशानी होगी। ये सोचकर वे मोबाइल फोन से फोटो-वीडियो बना लेते हैं, लेकिन घायल की जान बचाने के लिए कोई उपाय नहीं करते। इससे घायल तड़प-तड़प कर सड़क पर ही दम तोड़ देता है।

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