अहिल्याबाई धार्मिक चेतना की संवाहक थीं : पाणिग्रही

भास्कर न्यूज| महासमुंद महासमुंद नगर के टाउन हॉल में शुक्रवार को पुण्यश्लोक रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जन्म जयंती के पर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अहिल्याबाई होलकर के जीवनी के बारे में सभी को जानकारी दी गई। भाजपा जिलाध्यक्ष येतराम साहू ने रानी अहिल्याबाई होलकर जी के जीवन मूल्यों, उनके योगदान व इस आयोजन की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा, रानी अहिल्याबाई भारतीय इतिहास की एक ऐसी महान विभूति हैं, जिन्होंने अपने शासनकाल में सेवा, समर्पण और न्याय के मूल्यों को स्थापित किया। उनकी जयंती हम सभी के लिए प्रेरणा का अवसर है। मुख्यवक्ता भाजपा रायपुर संभाग प्रभारी जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा, होलकर साम्राज्य की महान शासिका रानी अहिल्याबाई केवल एक प्रशासिका नहीं थीं, वे समाज सुधारक, धार्मिक चेतना की संवाहक और जनकल्याण की प्रतीक थीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया बल्कि धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए अनेक कार्य किए। देशभर में उन्होंने सैकड़ों मंदिर, धर्मशालाएं, कुएं और धार्मिक स्थल पुनर्निर्मित कराए, जो आज भी उनके सेवा भाव की गवाही देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि रानी अहिल्याबाई का शासन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक रहा है। आज के समय में उनकी तरह जनसेवा के भाव को अपनाकर ही हम सच्चे राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन सकते हैं। सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा, रानी अहिल्याबाई ने यह सिद्ध किया कि एक नारी न केवल घर बल्कि शासन और समाज को भी आदर्श रूप में संचालित कर सकती है। उन्होंने अपने शासन में गरीबों, किसानों, महिलाओं और धार्मिक स्थलों के हित में जो कार्य किए, वे अतुलनीय हैं। हमें उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लेना चाहिए। इस मौके पर संजय शर्मा, प्रदीप चंद्राकर, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व मंत्री पूनम चंद्राकर, पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू, शंकर अग्रवाल, इंद्रजीत सिंह खालसा गोल्डी, जिला पंचायत अध्यक्ष मोगरा पटेल, सुधा साहू सहित अन्य मौजूद थे। भाजपा जिलाध्यक्ष येतराम साहू ने कहा, हमें गर्व है कि हम रानी अहिल्याबाई जैसी महान विभूति की जयंती मना रहे हैं। वे न्यायप्रियता, धर्मनिष्ठा और नारी शक्ति की प्रतीक थीं। उन्होंने समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए कार्य किया और उनके सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं। छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक राज्य में उनके आदर्शों को जनजागरण का माध्यम बनाना आवश्यक है।

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