PM आवास अधूरा लेकिन पूर्ण दर्शाया:गरियाबंद में फर्जी जियो टैगिंग से दिखाई प्रगति; एक मकान की फोटो से कई हितग्राहियों का निपटारा किया

गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ी अनियमितता सामने आई है। मैदानी कर्मचारियों ने फर्जी जियो टैगिंग के जरिए योजना की प्रगति दिखाने का खेल रचा है। जिले में एक महीने के अंदर 1366 आवासों को पूर्ण बताया गया। इनमें से 400 से अधिक आवासों की वास्तविक स्थिति संदिग्ध पाई गई है। देवभोग और मैनपुर जनपद क्षेत्र में यह गड़बड़ी सबसे ज्यादा की गई है। जांच में पता चला कि झाखरपारा के सुंदरसिंह और दहीगांव के परमेश्वर सिंह समेत 20 से अधिक हितग्राहियों के मकानों की छत तक नहीं बनी थी। फिर भी इन्हें 15 मई को पूर्ण दर्शाया गया। जांच में ये भी सामने आया है कि करीब 30 हितग्राहियों की जियो टैगिंग एक ही मकान में की गई है। एक मकान को अलग-अलग एंगल से फोटो लेकर दो हितग्राहियों को देते थे। जिला पंचायत CEO जी आर मरकाम ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, 25 जवाबदारों को शो काज नोटिस भी थमाया है। 30 हितग्राहियों की जियो टैगिंग एक ही मकान में दहीगांव के यादराम का मकान डोर लेवल तक नहीं पहुंचा था। लेकिन किसी दूसरे के मकान की तस्वीर का इस्तेमाल कर इसे भी पूरा बता दिया गया। पिछले 15 दिनों की प्रगति रिपोर्ट में इसी तरह की अनियमितताएं की गई हैं। वहीं, पुरनापानी के चूमन लाल और जय सिंह जैसे करीब 30 हितग्राहियों की जियो टैगिंग एक ही मकान में की गई। झाखरपारा के भावेंद्र और रूपसिंह के मामले में तो प्लिंथ लेवल के बिना ही एक मकान को अलग-अलग एंगल से फोटो लेकर दो हितग्राहियों का निपटारा कर दिया गया। हितग्राहियों के मकान की वास्तविक स्थिति को गलत दर्शाया देवभोग जनपद प्रशासन द्वारा जिला को सौंपे गए रिपोर्ट के मुताबिक, देवभोग ब्लॉक में स्वीकृत 6725 आवास में से 1 मई की स्थिति में 2700 अप्रारंभ थे और केवल 1200 आवास पूर्ण की स्थिति में थी। लेकिन महज 15 दिनों के भीतर 543 आवास प्रारंभ हो गए और अप्रारंभ मकानों के आंकड़े कम होकर 2157 हो गई। पूर्ण आवास की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी होकर 1200 से सीधे 1658 पहुंच गया। दूसरी और तीसरी किश्त जारी आंकड़ों में भी इजाफा हुआ। पड़ताल में पाया गया है कि इस आंकड़े तक पहुंचने ज्यादातर हितग्राहियों के मकान की वास्तविक स्थिति को गलत दर्शाया गया है। 15 दिनों में तेजी से बढ़ा प्रतिशत रिपोर्ट के मुताबिक 17 अप्रैल की स्थिति में जिले में स्वीकृत 34138 आवास में केवल 5339 पूर्ण थी लेकिन ठीक 15 दिन बाद आंकड़ा बढ़ कर 15 मई की स्थिति में 7214 हो गया। ब्लॉक वार पूर्णता का प्रतिशत देखे तो उपरोक्त अवधि में छुरा की प्रगति 18.67% थी जो 24.24 हुआ। देवभोग में 17 से बढ़ कर 23.09% फिंगेश्वर में 24.85% था जो बढ़ कर 32.43 हो गया। सबसे कम प्रगति देने वाले गरियाबंद ब्लॉक में 13.6% से बढ़ कर आंकड़ा 16.46 प्रतिशत हुआ और सबसे कमजोर मैनपुर ब्लॉक में 8.82 प्रतिशत से बढ़कर प्रगति को 12.62 प्रतिशत बढ़ाया गया। जानिए बोगस जियो टैगिंग की जरूरत क्यों पड़ी हर जनपद को सेक्टर में बांट आवास निर्माण के गति लाने तकनीकी सहायक, पंचायत सचिव से लेकर आवास मित्र को जवाबदार बनाया गया। 15 दिन पहले सीएम ने कलेक्टरों की बैठक लेकर पीएम आवास में तेजी लाने कमजोर कड़ी पर कार्रवाई का निर्देश दे दिया। 25 जवाबदारों को शो काज नोटिस जिला पंचायत CEO जी आर मरकाम के मुताबिक, अब तक फिंगेश्वर के 18, छुरा में 13, गरियाबंद में 16, मैनपुर में 34 और देवभोग में 25 जवाबदारों को शो काज नोटिस थमाया गया। साथ ही प्रगति के जिम्मेदार जनपद सीईओ और पीओ को भी जवाब तलब किया गया है। जांच के बाद होगी उचित कार्रवाई – CEO एक परिवार के दो हितग्राही एक साथ भी आवास निर्माण कर रहे, तय लम्बाई चौड़ाई ज्यादा वाले मकान पर ही दो-दो हितग्राही की जियो टैगिंग हुई होगी। वास्तविक प्रगति स्थिति के बजाय बोगस रिपोर्ट बनाया गया होगा तो इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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