राज्य सरकार द्वारा महंगाई भत्ते (डीए) की बढ़ोतरी में विलंब के विरोध में पेंशनर समाज ने आदेश की प्रति जलाकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। पेंशनर्स का कहना है कि राज्य सरकार डीए की राशि देने में 8 से 9 महीने का समय लेती है। इससे पेंशनर्स और कर्मचारियों को प्रति व्यक्ति 10 से 15 हजार रुपए तक का नुकसान होता है। केंद्र सरकार जनवरी और जुलाई में नियमित रूप से डीए का भुगतान करती है। केंद्रीय कर्मचारियों को देरी होने पर भी पूरी बकाया राशि मिलती है। लेकिन राज्य सरकार की देरी से पेंशनर्स मानसिक रूप से परेशान हैं। सरकार से समय पर पूरी राशि का भुगतान करने की मांग पेंशनर समाज के सदस्यों ने कहा कि वे जीवन निर्वाह भत्ते पर निर्भर है। सरकार की इस देरी से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब भी सरकार को जरूरत पड़ती है, वे पूरा सहयोग करते हैं। लेकिन सरकार उनकी बारी आने पर पीछे हट जाती है। पेंशनर्स का आरोप है कि राज्य सरकार आर्थिक रूप से मजबूत है। फिर भी डीए की राशि देने के समय वह आर्थिक कमजोरी का हवाला देती है। पेंशनर्स की मुख्य मांग है कि सरकार समय पर पूरी राशि का भुगतान करे।


