बच्चे का जन्म घर में खुशियां लाता है, लेकिन इसमें किसी भी तरह की लापरवाही मां और बच्चे दोनों के जीवन पर संकट ला सकती है। इसे सभी जानते हैं, लेकिन फिर भी नवजात को जन्म देते समय भारत में प्रति मिनट एक महिला की जान चली जाती है। प्रेगनेंसी से लेकर डिलिवरी तक होने वाले कांप्लिकेशन और इन्हें रोकने के उपाय व इससे संबंधित अन्य मुद्दों पर एसआरएमएस मेडिकल कालेज में आयोजित क्रिटिकल केयर इन आब्सटेट्रिक्स विषय पर आयोजित सीएमई में चर्चा हुई। नई दिल्ली, लखनऊ, एएमयू, हल्द्वानी और बरेली के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सीएमई में विभिन्न मुद्दों पर अपने व्याख्यान दिए और सुरक्षित डिलिवरी के साथ महिलाओं की सेहत पर बात की। सीएमई में पीजी स्टूटेंड्स के लिए ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी पर लास्ट मिनट प्रिपरेशन बुक का भी लोकार्पण किया गया। सीएमई में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी पर लास्ट मिनट प्रिपरेशन बुक का भी हुआ लोकार्पण बरेली ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (बीओजीएस) के सहयोग से एसआरएमएस मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओर से रविवार को क्रिटिकल केयर इन ऑब्सटेट्रिक्स विषय पर एसआरएमएस में सीएमई हुई। इसमें पैनल डिस्कसन, क्विज के साथ ही एक दर्जन से ज्यादा विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। सीएमई के उद्घाटन सत्र में एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति जी ने बच्चे के जन्म पर होने वाली माताओं की मौतों को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि बच्चे का जन्म, खुद उसे जन्म देने वाली मां का भी दूसरा जन्म होता है। मां को भी दूसरी जिंदगी मिलती है। लेकिन तमाम रूढ़ियों के चलते जन्म के समय अधिकांश माएं सुरक्षित डिलिवरी के लिए अस्पतालों तक नहीं पहुंच पातीं। यह दुखद स्थिति है। अस्पताल पहुंचने के बाद भी कुछ माताओँ को उनके कांप्लिकेशन के चलते बचाना संभव नहीं हो पाता। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। तभी बच्चों का सुरक्षित जन्म और मां के जीवन को बचाया जा सकता है। चिकित्सक का उद्देश्य मरीज की जान बचाना है। उपचार की सभी विधियां मरीज की जान बचाने के लिए ही हैं। चाहें वह एलोपैथिक हो, आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक। ऐसे में मरीज को जिस पैथी पर विश्वास है हमें उसी को फोकस करते हुए दूसरी पैथी की मदद से उसकी जान बचाने का प्रयास करना चाहिए। एसआरएमएस मेडिकल कालेज में जल्द शुरू होगी 100 बेड का होलिस्टिक मेडिकल केयर यूनिट आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, यूनानी और नेचुरोपैथी सहित सभी पैथियों से किया जाएगा मरीज का इलाज एसआरएमएस मेडिकल कालेज में जल्द ही 100 बेड का होलिस्टिक मेडिकल केयर यूनिट आरंभ की जाने वाली है। इसमें आयुर्वेद, होम्योपैथ, यूनानी और नेचुरोपैथी सहित सभी पैथियों से मरीज का इलाज किया जाएगा। इससे पहले दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ आरंभ हुई सीएमई के उद्घाटन सत्र में सभी का स्वागत एसआरएमएस मेडिकल कालेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष व सीएमई की आर्गनाइजिंग चेयरपर्सन प्रोफेसर (डा.) शशिबाला आर्य ने किया। जबकि सभी अतिथियों का आभार सीएमई की आर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डा.मृदु सिन्हा ने किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डा.आयुषि शुक्ला और डा.बबिता कुमारी ने किया। सीएमई में डा.मोनिका अग्रवाल (केजीएमयू लखनऊ), डा.संदीप साहू (पीजीआई लखनऊ), डा.विशाल सिंह (नई दिल्ली), डा.शहला जमाल (नई दिल्ली), डा.इंदू लता (पीजीआई लखनऊ), डा.आरएम शर्मा (नई दिल्ली), डा.भरत सिंह (लखनऊ), डा.अमरेश अग्रवाल (एसआरएमएस), डा.किरन शेषाद्रि (एमएच बरेली), डा.स्मिता गुप्ता (एसआरएमएस), डा.धीरज सक्सेना (एसआरएमएस), डा.मिलन जायसवाल (एसआरएमएस) ने अपने अपने विषयों पर व्याख्यान दिए। आयुर्वेदिक, होम्योपैथी, यूनानी और नेचुरोपैथी सहित सभी पैथियों से किया जाएगा मरीज का इलाज इस मौके पर विशिष्ट अतिथि एएमयू की महिला रोग विशेषज्ञ डा. सीमा हकीम, बरेली ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी (बीओजीएस) की अध्यक्ष डा. मृदुला शर्मा, एसआरएमएस मेडिकल कालेज के डायरेक्टर आदित्य मूर्ति, प्रिंसिपल एयरमार्शल (सेवानिवृत्त) डा.एमएस बुटोला, डा.मनोज कुमार टांगड़ी, डा.नमिता अग्रवाल, डा.गायत्री सिंह, डा.रुचिका गोयल, डा.बिंदू गर्ग, डा.पियूष अग्रवाल, डा.ललित सिंह, डा.जसविंदर सिंह, डा. विद्यानंद, डा.एसके सागर, डा.रुचि श्रीवास्तव, डा.वंदना नेगी, डा. हुमा खान, डा.गीता कार्की, डा.प्रीति सिंह, डा.प्रगति अग्रवाल, डा.पारुल महेश्वरी, डा.शालिनी महेश्वरी, डा.फहमी खान व अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।


