आरिफ हुसैन अख्तर| गुमला जिले में एक समय था जब हत्या के आंकड़े चरम पर हुआ करता था। मगर इस हत्या के आंकड़े का स्थान अब सड़क दुर्घटना, आत्महत्या व कुएं में डूबकर मरने के मामलों ने ले रखा है, जो समाज के लिए चिंता का विषय है। सड़क दुर्घटना में एक ओर जहां युवा वर्ग अकारण मौत के मुंह में समा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर तनिक तनिक बातों व छोटे-छोटे मामलों को लेकर आत्महत्या व कुएं में डूबकर कर खुद को मौत से गले लगा रहे हैं। जिले में होने वाले आत्महत्या के मौत के आंकड़ों पर अगर गौर करे तो यहां हर तीस दिन में 10 से 15 मौतें हो रही है। वर्ष 2025 के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां जनवरी माह से लेकर 19 मई तक 55 लोग आत्महत्या कर चुके है। इस प्रकार देखा जाय तो करीब 140 दिनों में 55 लोगों ने खुद से मौत को गला लगा लिए है। ये आंकड़े जिला प्रसाशन व जिलेवासियों के लिए चिंताजनक विषय है। वहीं आंकड़े सामाजिक ताने-बाने में गहरी दरार को दर्शाता हैं। आत्महत्या करने वालों में सबसे अधिक संख्या युवा वर्ग के लोगों की है। वे तनिक तनिक बातों से क्रोधित होकर मौत को गले लगाने से नहीं हिचक रहे हैं। इतना ही नहीं जान बूझकर कुएं में डूबकर आत्महत्या किए जाने के आंकड़े भी चौकाने वाले है। जनवरी से 19 मई तक करीब 40 लोगों से अधिक की मौत डूबने से हो चुकी है। हालांकि इस आंकड़ों में कुछ संख्या हादसों से भी जुड़ा हुआ है।


