रामगढ़ जिले के बरका सयाल क्षेत्र में भुरकुंडा परियोजना कार्यालय के सामने विस्थापितों ने धरना दिया। देवरिया बरगांवा और दुंधवा के मूल विस्थापित रैयत एकजुट हुए। सैकड़ों महिला-पुरुष पारंपरिक हथियार और ढोल-नगाड़ों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। विस्थापितों का आरोप है कि देवरिया और दुंधवा रेगनू गांव को कई वर्षों से रोड सेल से दूर रखा गया है। उनका कहना है कि सीसीएल प्रबंधन कुछ बिचौलियों के चक्कर में फंसा है। इसी कारण अब तक प्रबंधन ने उनसे कोई वार्ता नहीं की है। हमारी जमीन ली गई, लेकिन रोजगार नहीं दिया गया: विस्थापित प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सीसीएल प्रबंधन उनसे वार्ता करे और रोड सेल में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करे। विस्थापितों का कहना है कि उनकी जमीन ली गई, लेकिन रोजगार नहीं दिया गया। सीसीएल प्रबंधन की ओर से कोई सुविधा भी नहीं मिल रही है। विस्थापितों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे भुरकुंडा के किसी भी परियोजना को चालू नहीं होने देंगे। रैयत विस्थापित मोर्चा ने सीसीएल प्रबंधन को मांग पत्र सौंपा है।


