रायपुर के डॉ भीमराव अम्बेडकर मेमोरियल अस्पताल में साउथ अफ्रीकी स्टूडेंट के गाल ब्लेडर के स्टोन की सफल सर्जरी की गई है। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में सर्जरी विभाग की हेड डॉ.मंजू ने बताया कि वो 2005 से अम्बेडकर हास्पिटल में अपनी सर्विसेज दे रहीं हैं। लेकिन ये पहली बार है कि किसी विदेशी महिला ने यहां ऑपरेट कराया हो। ऑपरेशन से पहले मरीज को उसके अफ्रीका भेजने की बात चल रही थी। लेकिन उसने हम पर विश्वास जताया। और ऑपरेशन के लिए अपनी अनुमित दी। इसके लिए मेल पर उनके पेरेंट्स का कंसेंट लिया गया था। मरीज के अटेंडर सिबोनेलो सनेलिस जुंगु ने ऑपरेशन से पहले कहा था कि भारत के डॉक्टर साउथ अफ्रीका में मरीजों का सफल इलाज कर रहे हैं। ऐसे में हम भारत में इलाज करा सकते हैं। इसके लिए अफ्रीका जाने की जरूरत नहीं है। लेप्रोस्कोपिक कोलीसिस्टेकटॉमी सर्जरी की गई डॉ मंजू ने बताया कि मरीज को छह महीने से रह-रहकर पेट में दर्द उठ रहा था। जांच में गाल ब्लेडर में स्टोन सामने आया। इसके बाद लेप्रोस्कोपिक कोलीसिस्टेकटॉमी सर्जरी की गई। वहीं सर्जरी के बाद मरीज का कहना है कि वह पहले से बहुत अच्छा महसूस कर रही है । डॉ. मंजू सिंह के अनुसार, जब ये स्टूडेंट यहां भर्ती हुई तब हमने नियमानुसार सबसे पहले इसकी सूचना चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर को दी। डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने मरीज की सर्जरी से संबंधित समस्त औपचारिकताओं को अतिशीघ्र पूर्ण कराकर विदेशी स्टूडेंट के इलाज को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। जानिए क्या है लेप्रोस्कोपिक कोलीसिस्टेकटॉमी लेप्रोस्कोपिक कोलीसिस्टेकटॉमी सर्जरी में गाल ब्लेडर को शरीर से हटाया जाता है। यह प्रक्रिया लेप्रोस्कोप यानी पतली कैमरा लगी हुई ट्यूब की सहायता से होती है। इस दौरान मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया दिया जाता है। एक चीरे से लेप्रोस्कोप डाला जाता है और अन्य चीरे से सर्जिकल उपकरण। स्क्रीन पर देखते हुए गाल ब्लेडर को काटकर निकाल दिया जाता है। चीरे बंद कर टांके लगाए जाते हैं। इस सर्जरी में कम चीरे, कम दर्द, जल्दी रिकवरी हो जाती है और अस्पताल में कम समय लगता है। ऑपरेशन करने वाली टीम में ये रहे शामिल मरीज का ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ.मंजू सिंह के साथ डॉ.अमित अग्रवाल, डॉ. मनीष साहू, डॉ.अंजलि जालान, डॉ. आयुषी गोयल, डॉ.पूजा जैन और एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रतिभा शाह एवं डॉ. मंजुलता टंडन एवं शामिल रहीं।


