छत्तीसगढ़ के शिक्षक संगठनों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है। सर्व शैक्षिक संगठन के बैनर तले 23 शिक्षक संगठनों ने मंत्रालय और संचालनालय में ज्ञापन सौंपा है। शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांगों में विसंगतिपूर्ण युक्तिकरण को रद्द करना शामिल है। साथ ही सोना साहू के समान एक लाख से अधिक शिक्षकों को एरियर्स सहित क्रमोन्नति वेतनमान की मांग की गई है। शिक्षक नेताओं ने पुरानी पेंशन बहाली और प्रशिक्षित शिक्षकों के प्रमोशन के लिए बीएड की अनिवार्यता में छूट की मांग भी रखी है। 2008 के सेटअप में बदलाव स्वीकार नहीं संगठनों का कहना है कि प्राथमिक शालाओं में दो शिक्षकों से कैसे काम चलेगा। 2008 के सेटअप में किसी भी तरह का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह सेटअप 2009 में केंद्र सरकार के शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत लागू किया गया था। रिक्त पदों पर नई भर्तियां की मांग प्रांताध्यक्षों ने कहा कि रिक्त पदों पर नई भर्तियां की जाएं। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि शिक्षा विभाग लगातार नए प्रयोग कर रहा है। पिछले साल भी 2008 के सेटअप को रद्द करने का प्रयास किया गया था, जिसे विरोध के बाद रोका गया। इस बार यह प्रक्रिया शिक्षक संगठनों से बिना चर्चा के शुरू की गई। अगर एक सप्ताह में मांगें नहीं मानी गईं तो 28 मई से रायपुर के मंत्रालय महानदी भवन में अनिश्चितकालीन घेराव और धरना प्रदर्शन किया जाएगा। संगठनों ने कहा है कि कानून व्यवस्था बिगड़ने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।


