भ्र्ष्टाचार का नशा:चहेतों को टेंडर दिलाने के लिए बदलीं शर्तें, इसी ने विनय चौबे को पहुंचाया जेल

झारखंड में शराब घोटाला मामले में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग झारखंड के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह के विरुद्ध रायपुर के आर्थिक अपराध अन्वेषण (ईओडब्ल्यू) में भी दर्ज है। चौबे पर साजिश के तहत जालसाजी, धोखाधड़ी से संबंधित मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। आरोप है कि अपने लोगों को टेंडर दिलाने के लिए विनय चौबे और सिंडिकेट ने टेंडर की शर्तें ही बदल दी। देशी-विदेशी शराब का टेंडर सिंडिकेट के लोगों को दिलवाने के लिए झारखंड आबकारी नीति में फेरबदल किया और झारखंड सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। रांची के अरगोड़ा निवासी विकास सिंह की शिकायत के आधार पर ईओडब्ल्यू रायपुर के इंस्पेक्टर बृजेश कुशवाहा ने यह प्रा​थमिकी दर्ज की है। प्राथमिकी में छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, अनवर ढेबर, अरविंद सिंह, प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स सुमित फैसिलिटीज के संचालक विधु गुप्ता व मैनपावर सप्लाई करने वाली कंपनी, शराब आपूर्ति करने वाली एजेंसियों व अन्य को भी आरोपी बनाया गया है। 7 सितंबर, 2024 को दर्ज प्राथमिकी में आरोप है कि अनिल टुटेजा, आईटीएस के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुण पति त्रिपाठी व उनके सिंडिकेट ने झारखंड के अफसरों संग षडयंत्र कर झारखंड की आबकारी नीति में फेरबदल किया। सत्ता के करीब थे विनय चौबे विनय चौबे झारखंड कैडर के चर्चित आईएएस अफसरों में से एक रहे हैं। नगर निगम प्रशासक से डीसी,मुख्य चुनाव पदाधिकारी से विभिन्न विभागों के सचिव से सीएम के सचिव तक का सफर तय करने वाले चौबे की ब्यूरोक्रेसी में तूती बोलती थी। 2007 में उन्हें रांची नगर निगम का प्रशासक बनाया गया था। शराब घोटाले की पूरी कहानी 1. टेंडर की शर्तें ऐसी कि कुछ ही लोग कर सकते थे अप्लाई: शराब की बिक्री के लिए शर्तें ऐसी रखी गईं कि कुछ ही लोग इसके लिए अप्लाई कर सकते थे। इसके लिए झारखंड विधानसभा में संकल्प पारित कराया गया। विनय चौबे और गजेंद्र सिंह के संरक्षण में उत्पाद विभाग के अधिकारियों द्वारा अनवर ढेबर व उनके सिंडिकेट को शराब सप्लाई एजेंसी व प्लेसमेंट एजेंसियों को टेंडर दिलाने के लिए अनिवार्य शर्तों में भी बदलाव कर दिया गया। 2. 2 साल का टर्नओवर 100 करोड़ होने की डाली शर्त: टेंडर में विशेष तौर पर 2 साल का टर्नओवर 100 करोड़ का होने की शर्त डाल दी गई। निविदा की ईएमडी राशि 49.57 लाख व कुल बैंक गारंटी 11.28 करोड़ की मांग की गई। 1000 कर्मचारियों, जिनका ईपीएफ डिपाजिट 6 माह में किया गया हो, शर्त रखी गई। इस तरह छत्तीसगढ़ की मैन पावर सप्लाई कंपनी सुमित फैसीलिटीज, इगल हंटर सालुसंस, ए टू जेड इंफ्रा सर्विस को झारखंड में कार्य प्रदान किया गया। 3. होलोग्राम छापने वाली जिस कंपनी को दिया काम, वो भी आरोपी: प्रिज्म होलोग्राम एंड फिल्म सिक्यूरिटी लिमिटेड को शराब की बोतलों में होलोग्राम छापने का काम मिला था। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ये सभी आरोपी भी हैं। इनके विरुद्ध जांच के क्रम में झारखंड का कनेक्शन जुड़ा था। झारखंड में इन कंपनियों पर कार्रवाई हो चुकी है। मेसर्स प्रिज्म पर होलोग्राम छापने पर रोक लगा दी गई थी और उसे ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया था। ईडी भी मनी लान्ड्रिंग के तहत दर्ज कर सकता है केस, करेगा जांच भी एसीबी में 20 मई 2025 को दर्ज प्राथमिकी के आधार पर भी ईडी मनी लान्ड्रिंग के तहत ईसीआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर सकता है। ईडी ने इससे पहले छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर गत वर्ष ईसीआइआर किया था। ईडी ने तब जांच के दौरान आईएएस विनय कुमार चौबे व संयुक्त आयुक्त उत्पाद गजेंद्र सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की थी। ईडी ने छापेमारी के दौरान अधिकारियों के आइफोन जब्त किए थे। ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले थे, जिसकी ईडी जांच कर रही है। सीबीआई भी इस मामले में अब कसेगा घेरा, ईओडब्ल्यू ने की थी अनुशंसा शराब घोटाला प्रकरण में रायपुर की आर्थिक अपराध इकाई (ईओडब्ल्यू) में दर्ज केस में जल्द ही सीबीआई की भी एंट्री होगी। ईओडब्ल्यू ने सीबीआई से इसकी अनुशंसा की थी और उक्त केस की जांच करने का आग्रह किया है। इससे संबंधित दस्तावेज भी ईओडब्ल्यू ने सीबीआई मुख्यालय को भेजा था। बताया जा हा है कि झारखंड में शराब घोटाला केस में सीबीआई जांच होगी। इसकी तैयारी चल रही है। झारखंड बनने के बाद अब तक पांच आईएएस गए जेल जेल जानेवाले 4 आईएएस रह चुके हैं रांची डीसी झारखंड कैडर के पांच आईएएस अफसर भ्रष्टाचार के मामले में जेल जा चुके हैं। सबसे पहला नाम है स्व. सजल चक्रवर्ती का। इसके बाद तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव डॉ. प्रदीप कुमार, पूजा सिंघल, छवि रंजन और अब विनय चौबे । पूजा सिंघल को छोड़कर इन पांच में से चार रांची के डीसी रह चुके हैं। पूजा सिंघल: आईएएस अफसर पूजा सिंघल को मनरेगा घोटाला में ईडी ने 8 मई 2022 को गिरफ्तार किया था। पूजा के करीबी सीए सुमन कुमार के आवास से 19.31 करोड़ नगद बरामद हुआ था। डॉ. प्रदीप कुमार: आईएएस अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार पर 130 करोड़ रु का दवा घोटाला का आरोप था। बाद में सीबीआई ने इस मामले की जांच करते हुए उन्हें जेल भेज दिया था। सजल चक्रवर्ती: चारा घोटाला में चक्रवर्ती पर भ्रष्टाचार की जानकारी होने पर भी कार्रवाई नहीं करने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी। 5 साल के लिए जेल गए थे। छवि रंजन: आईएएस अधिकारी छवि रंजन को रांची डीसी रहते हुए जमीन की खरीद-बिक्री करने वालों को सहयोग करने, कागजात में हेरफेर कराने के केस में ईडी ने 2023 में गिरफ्तार किया था।

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