मरीजों को राहत:सदर अस्पताल में हृदय रोग का होगा इलाज, बन रही कैथलैब, 60 दिन के भीतर एजेंसी अस्पताल को सौंपेगी

राजधानी के सदर अस्पताल में अब हृदय की सभी तरह की बीमारी का बेहतर इलाज होगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा कैथ लैब सेटअप किया जा रहा है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। करीब 8 करोड़ की राशि से कैथ लैब तैयार कराया जाना है। सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, ई-टेंडर को लेकर 22 मई को प्री-बीड बैठक रखी गई है। टेंडर भरने की अंतिम तारीख 28 मई निर्धारित की गई है। टेंडर में यह भी शर्त रखी गई है कि चयनित एजेंसी को 60 दिन के भीतर कैथलैब तैयार कर प्रबंधन को सौंपना होगा। अब देखना यह होगा कि टेंडर में कितनी एजेंसी रुचि लेती है और टेंडर फाइनल होने के बाद कितने दिनों में कैथलैब पूरा होता है। वर्तमान में सदर अस्पताल में करीब 8 माह से कार्डियोलॉजी विभाग संचालित है, जहां हर महीने हजारों रोगियों को दिल से संबंधित बीमारियों का उपचार मिल रहा है। कार्डियोलॉजी विभाग में डीएम कार्डियोलॉजी डॉ. राजेश कुमार झा, डॉ. अमित चतुर्वेदी, डॉ. धनंजय कुमार सिंह और डॉ. साकेत सोनी अपनी सेवा दे रहे हैं। रिम्स के बाद कैथलैब सुविधा वाला दूसरा संस्थान रिम्स के बाद सदर अस्पताल, राजधानी का दूसरा ऐसा सरकारी संस्थान होगा जहां कैथ लैब के साथ दिल की मरीजों का इलाज होगा। राजधानी रांची में अभी तक रिम्स ही एक मात्र सरकारी अस्पताल है जहां कार्डियोलॉजी और कार्डियो थोरेसिक सर्जरी का पूरा विभाग संचालित है। रिम्स में अत्याधुनिक ओटी के साथ-साथ एडवांस सुविधाओं से लैस कैथ लैब भी है। अब रिम्स पर मरीजों का दबाव कम हो जाएगा। बीपीएल-आयुष्मान के मरीजों को निशुल्क सुविधा डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि राज्य के बीपीएल और आयुष्मान भारत योजना से आच्छादित मरीजों को सभी सुविधाएं निशुल्क प्रदान की जाएगी। जबकि अन्य सामान्य मरीजों को भी नॉमिनल चार्ज पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो निजी अस्पतालों से बेहद कम होगी। होगा एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी, लगेगा पेसमेकर भी सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार के अनुसार, कैथ लैब शुरू हो जाने के बाद सदर अस्पताल में ही दिल के मरीजों की एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेस मेकर लगाने जैसी सुविधा सदर अस्पताल में ही मिलने लगेगी। कैथलैब या कैथीटेराइजेशन लैबोरेटरी एक विशेष प्रकार की प्रयोगशाला है, जो कार्डियोलॉजी में इस्तेमाल होती है। यह एक ऐसे अस्पताल विभाग में स्थित होती है जहां हृदय संबंधी समस्याओं के निदान के लिए विशेष उपकरण उपलब्ध होते हैं।

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