पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति मेडिकल कॉलेज से MBBS और PG किए हुए करीब 900 डॉक्टरों की बॉन्ड पोस्टिंग पिछले चार महीनों से अटकी हुई है। पोस्टिंग नहीं मिलने से इन डॉक्टरों को 18 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। दरअसल, इन स्टूडेंट्स ने अपना एजुकेशनल कोर्स इस साल जनवरी में पूरा कर लिया था। नियम ऐसा है कि छह महीने के भीतर स्वास्थ्य विभाग ने बॉन्ड पोस्टिंग नहीं दी, तो विभाग आगे फिर इन्हें पोस्टिंग देने के लिए बाध्य नहीं होगा। ऐसे में विभाग जल्द ही इन्हें प्रदेश के अलग–अलग स्वास्थ्य संस्थानों में पोस्ट कर सकता है। लेकिन इस बार पोस्टिंग की प्रक्रिया में बदलाव की संभावना है। अब तक विभाग रैंडमली डॉक्टर्स को अलग–अलग जिले अप्वाइंट करता था। इस बार पहले डॉक्टरों की काउंसलिंग की जाएगी। इसके तहत डॉक्टर अपने प्रेफरेंस के आधार पर तीन जगह चुन सकते हैं। परसेंट के आधार पर दिया जाएगा तवज्जो विभाग परसेंट के आधार पर डॉक्टरों की प्रेफरेंस को तवज्जो देगा। वहीं जो डॉक्टर बच जाएंगे, उन्हें फिर विभाग अपने हिसाब से अप्वाइंट करेगा। ये पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। विभाग इसके लिए अपनी साइट अपडेट कर रहा है। अपडेट के बाद डॉक्टर प्रेफरेंस फॉर्म भर पाएंगे। सोमवार को जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने जल्द बॉन्ड पोस्टिंग के लिए चिकित्सा शिक्षक आयुक्त को ज्ञापन भी सौंपा था। बॉन्ड पोस्टिंग लेट होने से गुड सर्विस नहीं मिल रही दरअसल, बॉन्ड पोस्टिंग के तहत बेहतर सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से इन जूनियर डॉक्टर्स को प्रदेश के अलग–अलग स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाता है। इनमें जिला अस्पताल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। पोस्टिंग लेट होने से इन संस्थानों में आने वाले मरीजों को मिल रही सर्विस में भी इम्पैक्ट पड़ रहा है। डॉक्टरों को दो तरफा नुकसान उठाना पड़ रहा है एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ रेशम सिंह ने बताया कि सिर्फ मरीजों का ही नहीं जूनियर डॉक्टर्स को भी नुकसान हो रहा है। पिछले चार महीने से ये डॉक्टर्स बॉन्ड अवधि के चलते प्राइवेट सेक्टर्स में काम नहीं कर पा रहे हैं। जबकि पोस्टिंग दे दी गई होती तो MBBS डॉक्टर के जेब में महीना 45 हजार आना शुरू हो जाते। वहीं PG डॉक्टर्स को सर्विस देने के एवज में 75 हजार की मंथली सैलरी मिल रही होती। इस पूरे मामले को लेकर डॉक्टरों में नाराजगी है। इस लिहाज से देखा जाए तो इन डॉक्टर्स को अब तक 18 करोड़ 6 लाख का नुकसान हो चुका है। स्पेशलाइजेशन कोर्स करने में भी लेट होगा सिंह ने बताया– डॉक्टरों का आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है। इसके अलावा स्पेशलाइजेशन कोर्स करने में भी लेट होगा। विभाग छह महीने पूरे होने से कुछ दिन पहले पोस्टिंग दे देगा। इसके बाद हमें दो साल सर्विस देनी होगी। ये सर्विस पूरी करने के बाद ही हम आगे दूसरा कोई कोर्स कर पर पाएंगे। यानी लेट पोस्टिंग मिलने के चलते स्पेशलाइजेशन कोर्स करने में छह महीने का टाइम अनावश्यक जुड़ जाएगा। प्रदेश को भी इसके चलते लेट से स्पेशलाइज्ड डॉक्टर मिलेंगे। बॉन्ड पोस्टिंग जल्द देने के अलावा जूडा ने ये भी मांग की है कि मध्यप्रदेश के तर्ज पर बॉन्ड पोस्टिंग की अवधि दो साल से घटाकर एक साल कर दी जाए। हालांकि इस पूरे मामले विभाग की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।


