अमन गुप्ता से बातचीत:सफल स्टार्टअप के लिए बड़े ऑफिस व बड़ी टीम से पहले प्रोडक्ट पर फोकस करें, बदलाव के लिए फीडबैक सिस्टम मजबूत बनाएं

‘जब कोई फिरंगी प्रोडक्ट भारत में आता है तो यहां उसे खरीदने वालों की लाइन लगती है। पर हम चाहते हैं फिरंगी भी भारतीय प्रोडक्ट लाइन लगाकर खरीदें।’ करीब नौ महीने पहले बोट के फाउंडर अमन गुप्ता ने यह बात कही थी। लेकिन अमन इस बात पर अब अमल करने जा रहे हैं। अमन ने भास्कर को बताया कि जल्द ही बोट वैश्विक मार्केट में उतरने जा रही है। सैमसंग-शाओमी जैसी दिग्गज कंपनियों को पछाड़कर आज बोट दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी वियरेबल डिवाइस कंपनी है। वे कहते हैं,‘भविष्य में भारत दुनिया की स्टार्टअप कैपिटल के रूप में जाना जाएगा।’ पढ़िए भास्कर के साथ अमन गुप्ता की खास बातचीत… आइडिया लॉकर में रखने के लिए नहीं है… उसे अमल में लाना भी जरूरी ‘बोट’ की शुरुआत से पहले आपने पांच असफलताएं देखीं, उनसे क्या सीखा?
अपनी पहली कंपनी में मैंने बहुत बड़ा ऑफिस लिया था। बहुत बड़ी टीम बनाई थी। उस समय मेरा दिमाग प्रोडक्ट की तुलना में इन सभी चीजों पर ज्यादा खर्च होता था। लेकिन वहां से मैंने सीखा कि इस तरह के खर्चे तो बाद में भी कर लेंगे, पहले प्रोडक्ट और मार्केट में उसकी उपयोगिता पर ध्यान देना जरूरी है। इसीलिए विफलता सिर्फ एक अनुभव नहीं है। उन गलतियों ने मुझे सिखाया कि किन्हें दोहराना नहीं है। मैं तो कहता हूं ‘फेलियर इज द गेटवे टू सक्सेस।’ ‘बोट’ की सफलता और इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे सबसे बड़े फैक्टर्स क्या रहे?
कस्टमर फर्स्ट की पॉलिसी, सही प्राइसिंग और महत्वाकांक्षा, ये 3 फैक्टर्स बिजनेस सफल बनाते हैं। उदाहरण लें तो बोट में हमने फीडबैक सिस्टम के लिए ‘बोटहेड्स’ कम्युनिटी विकसित की है। हम इन्हें परिवार का दर्जा देते हैं। उनके जो फीडबैक होते हैं उसे नए प्रोडक्ट में लागू करते हैं ताकि सही दिशा में बदलाव होता रहे। एक आइडिया को प्रोडक्ट में कैसे तब्दील करें, उद्यमी बनने की प्रक्रिया क्या है?
यदि आपके पास कोई आइडिया है, तो उसे तुरंत लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएं। एग्जीक्यूशन न करने पर कोई और उस आइडिया पर काम कर सकता है, आप पीछे रह जाएंगे। क्या आपका प्रोडक्ट समाज में किसी जरूरत को पूरा करता है? यदि हां, तो तय है कि इसे मार्केट में लाने का समय आ गया है। आइडिया लॉकर में रखने के लिए नहीं है। शेष | पेज 13 पर
उन्हें सही तरह से लागू करना ही असली काम है। भारत में कई स्टार्टअप्स डूब रहे हैं। क्या इसे चिंताजनक ट्रेंड मानना चाहिए?
ऐसा नहीं है। आज छोटे-छोटे गांवों और शहरों में भी नए स्टार्टअप्स उभर रहे हैं। दुनियाभर के स्टार्टअप के लिए भारत उदाहरण पेश करेगा। जरूर कुछ स्टार्टअप ​विफल हुए हैं, पर उनके लिए भी लर्निंग है। जैसे पहले लॉस मेकिंग स्टार्टअप्स भी चलते थे, और वह कोई बड़ी बात नहीं थी। पर लोग अब समझ गए हैं कि लॉस मेकिंग स्टार्टअप्स का मॉडल काम नहीं करता।

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