मौसम में परिवर्तन के चलते इस बार वायरल के नेचर में भी बदलाव दिखाई दे रहा है। इस बार रोगियों को ठीक होने में 15 दिन से अधिक का समय लग रहा है। साथ ही खांसी, जुकाम को भी ठीक होने में दो सप्ताह का समय लग रहा है। पहली बार बच्चों में वायरल फीवर के साथ चेहरे और बदन पर लालपन की शिकायत आ रही है। इस बार वायरल फीवर में खासतौर पर खांसी बच्चों को ज्यादा परेशान कर रही है। इस बार खांसी जो अमूमन 4 से 5 दिन में सही हो जाती थी, उसे सही होने में भी 10 से 15 दिन का समय लग रहा है। वायु प्रदूषण के कारण बच्चों के सांस लेन में फेफड़ों में संक्रमण तेजी से बढ़ता है। जो बच्चे कई आउटडोर खेल खेलते हैं उन बों में भी वायु प्रदूषण होने के कारण अस्थमा होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए इस मौसम में सर्दी और वायु प्रदूषण से पूरी तरह बच्चों को बचाव रखें। जेएएच की ओपीडी… आमतौर पर फीवर 5 से 7 दिन में हो जाता है सही जेएएच की मेडिसिन और पीडियाट्रिक विभाग की ओपीडी में वायरल इंफेक्शन के मरीज करीब 30 से 35% आ रहे हैं। वायरल फीवर को ठीक होने में आमतौर पर 5 से 7 दिन का समय लगता है लेकिन इस बार मौसम में हुए परिवर्तन और वायु प्रदूषण के चलते वायरल का नेचर बदल गया है। वायरल फीवर को ठीक होने में 15 दिन से अधिक का समय लग रहा है। पीडियाट्रिक… प्लेटलेट के अंदर हिस्टामिन से पड़ रहे हैं लाल चत्थे वायरल फीवर में पहली बार यह देखने में मिल रहा है कि बच्चों को बुखार आने के दूसरे या तीसरे दिन चेहरा और बदन लाल हो जाता है। यह परेशानी प्लेटलेट के अंदर हिस्टामिन रिलीज होने के कारण होता है। इससे बच्चों को खुजली की शिकायत भी हो रही है। ओपीडी में दिखाने आने वाले 30 से 35%बच्चों में परेशानी देखने को मिल रही है। बच्चों का सर्दी से पूरी तरह बचाव रखें। लक्षण- शरीर में दर्द, सिरदर्द और भूख न लगना बच्चों में फीवर होने पर सुस्ती, भूख न लगना, शरीर का तापमान बढ़ना, ठंड लगना जैसे प्रमुख लक्षण देखने को मिल रहे हैं। अधिकांश मामलों में देखने में आ रहा है इस बार वायरल में बच्चों के शरीर में दर्द होना, सिरदर्द रहना की भी शिकायतें आ रही हैं। वायरल होने पर बच्चों के सिर का तापमान 100.4 डिग्री फारेनहाइट से अधिक, मुंह के अंदर का तापमान 100 डिग्री बाजू के अंदर का तापमान – 99 डिग्री फारेनहाइट से अधिक होना। बचाव- बच्चों को संक्रमित व्यक्ति से दूर रखें वारयल फीवर संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, सांस लेने या संक्रमित सतहों को छूने से फैलता है। ऐसे में बच्चों को संक्रमित व्यक्ति के दूर रखें। बच्चों को हमेशा अच्छे से हाथ धुलाने की आदत डलवाएं। खाना न खाने पर उन्हें तरल पदार्थों का सेवन कराएं, ताकि वह शारीरिक रूप से कमजोर न हों।


