एसजीपीसी करेगी राजाओना की चिट्‌ठी पर विचार:पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीर सिख म्यूजियम में लगाने के फैसले पर जताया था विरोध

पंजाब के अमृतसर में गोल्डन टेंपल परिसर में मंजी साहिब दीवान हॉल में आज शुक्रवार पाऊटा साहिब शहीदी साके के शहीदों की स्मृति में एक विशेष शहादत समागम का आयोजन किया गया। जिसमें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना की तरफ से भेजे गए खत पर विचार रखे हैं। SGPC प्रधान ने जानकारी दी कि बंदी सिख भाई बलवंत सिंह राजोआणा ने एक नई चिट्ठी भेजी है, जो पंथ के लिए बेहद गंभीर भावनात्मक और वैचारिक महत्व रखती है। प्रधान धामी ने कहा, “हम इस चिट्ठी पर फिर से गहराई से विचार करेंगे और उसके आधार पर एक नई रूपरेखा बनाई जाएगी।” गौरतलब है कि इस खत में उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की तस्वीर को सिख अजायब घर में ना सुशोभित करने की बात कही है। तख़्तों की गरिमा की रक्षा के लिए SGPC बनाएगी नई नीति धामी ने हाल ही में श्री अकाल तख्त साहिब व पटना साहिब से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए चिंता जताई और कहा कि कुछ लोगों के अनुचित आचरण से पंथक माहौल प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा- “हम जैसे सामान्य लोग जब मर्यादा से हटकर व्यवहार करते हैं तो माहौल खराब होता है। SGPC ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक स्पष्ट नीति तैयार करेगी।” जानें क्या लिखा था खत में राजोआना ने पत्र में लिखा है कि डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कार्यकाल में उस राजनीतिक पार्टी का प्रतिनिधित्व किया, जिसे उन्होंने सिखों पर अत्याचारों का जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी, जिसकी ओर से मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहे, 1984 के सिख विरोधी दंगों की जिम्मेदार है। ऐसे में उनका चित्र सिखों की शहादत और गौरव का प्रतिनिधित्व करने वाले संग्रहालय में लगाना अनुचित और अस्वीकार्य है। राजोआना ने कहा- डॉ. मनमोहन सिंह उस पार्टी के प्रधानमंत्री रहे जो सिख कत्लेआम की दोषी है। उनका चित्र सिख संग्रहालय में लगाने का कोई औचित्य नहीं है। पटियाला जेल में बंद है राजोआना गौरतलब है कि बलवंत सिंह राजोआना 1995 में तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए हैं और फिलहाल पटियाला जेल में सजा काट रहे हैं। उनका यह पत्र SGPC के समक्ष गंभीर सवाल खड़ा करता है कि सिख संस्थानों में किन व्यक्तियों को स्थान दिया जाए और किन्हें नहीं। राजोआना की तरफ से लिखा गया खत-

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