मक्की के बीज पर सब्सिडी नहीं, धान की बिजाई पर जोर दे रहे किसान

^मक्की की फसल धान के समय में लगे तो यह बेस्ट है। यह ग्राउंड वाटर के लिए भी फायदेमंद है। इस बार किसान पहले से जयादा फसल लगाएंगे। विभाग की ओर से इस बार 2025 हेक्टेयर टारगेट पूरा करना है। जंडियाला-वेरका बेल्ट में किसान मक्की लगा रहे हैं। रईया का कुछ हिस्सा भी मक्की लगा रहा है। किसान जागरूक हो रहे हैं। किसानों को लाभ मिल रहा है। मक्की के बीज पर सब्सिडी अभी नहीं आई है। – सुखराज सिंह सिद्धू, एग्रीकल्चर डेवल्पमेंट अफसर। अमनदीप सिंह | अमृतसर जिले में किसान इस बार मक्की की बजाय धान की खेती को तवज्जो दे रहे हैं। इसकी बड़ी वजह मक्की के बीज पर सब्सिडी का न मिलना है। सरकार ने इस साल मक्की बीज पर कोई सबसिडी घोषित नहीं की। पहले यह सुविधा दी जाती थी। किसानों का कहना है कि बीते सीजन में मक्की बीज की कालाबाजारी हुई थी। इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। खेतीबाड़ी विभाग ने इस बार जिले में 2025 हेक्टेयर में मक्की लगाने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ 200 हेक्टेयर था। इस बार का टारगेट पूरा होना मुश्किल लग रहा है। विभाग किसानों को मक्की की खेती के लिए जागरूक करने में जुटा है। इसके लिए कैंप लगाए जा रहे हैं। पंजाब सरकार फसली विविधता योजना के तहत धान की जगह मक्की लगाने को कह रही है। जिले के वेरका और जंडियाला बेल्ट के कुछ किसानों ने जनवरी-फरवरी में मक्की लगाई थी। अब उसकी छल्ली मंडियों में पहुंचने लगी है। विभाग का कहना है कि किसान गेहूं की कटाई के बाद बरसात में मक्की लगाएंगे। हालांकि किसान मक्की में रुचि तो दिखा रहे हैं, लेकिन सब्सिडी न मिलने से वे खुलकर इसकी खेती नहीं कर रहे। लंबे समय से पंजाब के किसान धान और गेहूं पर ही निर्भर रहे हैं। वहीं किसानों का कहना है कि गेहूं में एक एकड़ के पीछे 10 हजार के करीब खर्चा आ जाता है, लेकिन मक्की में यह खर्चा 20 हजार से अधिक निकल जाता है। किसान लखबीर सिंह निजामपुर ने बताया कि साउणी (बरसात) सीजन मई-जून में किसान मक्की की फसल लगाते हैं। दूसरा सप्रिंगमेज जिसे जनवरी-फरवरी में लगाया जाता है। सप्रिंगमेज मक्की में पानी काफी लगता है और यह 4 महीने तक का समय ले जाती है। इसके विपरीत साउणी की फसल में 3 महीने लेती है। इसमें पानी का इस्तेमाल कम है। पिछले साल मक्की का रेट 2225 के पास था। किसान मक्की की फसल लगाना चाहते हैं लेकिन सरकार को मक्की के बीज की कालाबाजारी बंद करानी चाहिए। यहां तक कि इस बार के सीजन में मक्की के बीज पर कोई सब्सिडी सरकार ने घोषित नहीं की है।

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