बस्तर में फोर्स के साथ प्रशासन की कदमताल:ऑपरेशन की डेडलाइन तय होते ही 9 माह में 287 नक्सली ढेर; 865 ने हथियार छोड़े, 830 ​िगरफ्तार

बस्तर के जंगलों में फोर्स और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। बीते 18 माह से लगातार फोर्स ऑपरेशन चला रही है। पिछले साल 24 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन मार्च 2026 तय कर दी ​​​थी। उसके बाद से फोर्स के ऑपरेशन में खासी तेजी आई है। त​ब से 21 मई तक 287 नक्सली मारे गए। वहीं, 865 ने सरेंडर किया। जबकि 830 नकसली गिरफ्तार हुए।
बीते 18 महीनों में फोर्स ने 424 नक्सलियों को मार गिराया गया है। 1355 नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं और सरकार का हाथ थाम लिया है। सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर नक्सली लगातार सरेंडर कर रहे हैं। इन्हें सरकार रोजगार भी दे रही है। इन्हीं में से कई युवा फोर्स में शामिल हुए हैं, जो नक्सलियों से लड़ रहे हैं। 1430 नक्सलियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जो जेल में बंद है । फोर्स के साथ प्रशासन भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहा है। डीजीपी अरुण देव गौतम का कहना है कि 31 मार्च 2026 के बाद लोगों को एक नया बस्तर दिखेगा। यह बस्तर शांति, समृद्धि, संस्कृति और विकास का बस्तर होगा। सरकार नक्सलियों से आमने-सामने की लड़ाई के साथ-साथ विकास पर फोकस होकर काम कर रही है। जवान लड़ने के सा​थ बच्चों को पढ़ा भी रहे हैं। इलाज कर रहे हैं। सड़क बनाने में भी मदद कर रहे हैं। बस्तर में 330 किलोमीटर का सड़कों का जाल बिछाया गया है। आजादी के बाद कई गांवों का अंधेरा दूर हुआ है। एलमगुंडा, कुंडेड, छुटवाही, चिलकापल्ली, तिमेनार समेत 25 से ज्यादा गांव में पहली बार बिजली पहुंची है। 20 साल बाद डुमरीपालनार, तोड़का समेत 31 से ज्यादा गांवों में स्कूल की घंटी सुनाई दी है। इन गांवों में पहले गोलियों की आवाज गूंजती थी। कैंप खुलने से लोगों को गांव में ही राशन मिल रहा है। उन्हें पहले चावल लेने के लिए 10-15 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था। गांव के नजदीक स्वास्थ्य केंद्र खुल गया है। घर पर मितानिन आकर दवा दे रही हैं। बस्तर का स्वरूप बदलते जा रहा है। बस्तर विकास की राह पर है। हाईटेक हो रहा बस्तर| बस्तर में लगातार इंटरनेट सेवा बढ़ रही है। घने जंगल और पहाड़ों में मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में टेकुलगुडेम, गुंजेपार्टी, पुटकेल, तिमेनार समेत कई गांवों में 651 मोबाइल टॉवर लग चुके हैं। यहां बिजली पहुंचाई जा रही है। लोगों का आधार कार्ड बनाया जा रहा है। गांवों में बैंक खोले जा रहे हैं। महाराष्ट्र से तेलंगाना के घने जंगल में फोर्स बस्तर के घने जंगलों में फोर्स ऑपरेशन चला रही है, जिसे ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट नाम दिया गया है। जहां अब तक सरकार नहीं पहुंच पाई थी। वहां अब फोर्स पहुंच रही है। अबूझमाड़ के जंगल के भीतर कैंप खोले दिया गया है। महाराष्ट्र, तेलगांना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा तक फोर्स पहुंच गई है। 2023 से अब तक 64 नए कैंप खोले गए। इसमें मुरकुराजकोंडा, गलगाम, पंगुड,उस्कावाया कैंप शामिल है। आने वाले समय में 30 से ज्यादा और कैंप खोल जाएंगे। डेडलाइन के बाद यह सब हुआ… {बस्तर में बुनियादी सुविधाओं व विकास के लिए 221 करोड़ का प्रावधान। {बस्तर में स्कूल शिक्षा के लिए 30 करोड़ का प्रावधान। {आदिम जाति कल्याण के लिए बजट में 12 करोड़ रुपए दिए। {बस्तर में आवास निर्माण के लिए 300 करोड़ का प्रावधान। {नियद नेल्लानार योजना के लिए 25 करोड़ का प्रावधान। { बस्तर ओलंपिक केक लिए सरकार ने 5 करोड़ रुपए दिए। {जैव विविधता पर्यटन जोन के लिए 10 करोड़ रुपए दिए।

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