अमृतसर पहुंची पंजाब महिला आयोग की चेयरपर्सन:बोलीं- लिव-इन रिलेशनशिप समाज के लिए चिंता का विषय, कानून में संशोधन की मांग

पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन राज लाली गिल ने आज अमृतसर पुलिस लाइन में एक विशेष लोक अदालत का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं से जुड़े 65 मामलों की सुनवाई की। गिल ने लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह राज्य सरकार को कानून में संशोधन के लिए पत्र लिख रही हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के रिश्तों में न केवल युवा बल्कि विवाहित लोग भी शामिल हो रहे हैं। यह स्थिति समाज की नैतिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। महिला आयोग की चेयरपर्सन ने बताया कि मार्च 2024 से अब तक 2,500 से अधिक मामले आयोग के पास पहुंचे हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत का निपटारा कर दिया गया है। गिल ने स्पष्ट किया कि आयोग पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है और यह पूरी तरह से निष्पक्ष होकर काम कर रहा है। आयोग अब हर जिले में जाकर महिलाओं को जागरूक करने का काम करेगा। महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा करने पर दंडित किया जाना चाहिए
राज लाली गिल ने बताया कि आयोग हर जिले में जाकर महिलाओं को शिक्षित करने का काम करेगा। मोहाली स्थित आयोग कार्यालय तक पीड़ित महिलाओं की पहुंच को देखते हुए जिला स्तर पर सार्वजनिक बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। राज लाली गिल ने पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि महिलाओं के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वालों को दंडित किया जाना चाहिए। महिला आयोग इस मामले में काफी सख्त है, इसलिए किसी भी आम व्यक्ति को महिलाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। ऐसी अभद्र भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए। आयोग पर राजनीतिक दबाव के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आयोग किसी के साथ सहयोग नहीं कर रहा है। वह किसी को भी अपने ऊपर दबाव बनाने की इजाजत नहीं देता तथा सभी मामलों में मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। इससे राजनीतिक या अन्य दबाव के शिकार लोगों को पारदर्शी तरीके से न्याय दिलाने का लक्ष्य पूरा हो रहा है। सहनशीलता कम होती जा रही ​​​​​​​
राज लाली गिल ने कहा कि आज शादी, संपत्ति, एनआरआई सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं। इससे संबंधित मामले बहुत महत्वपूर्ण हैं। विवाह, दहेज, लड़कियों और महिलाओं का शोषण, लिव-इन रिलेशनशिप, घरेलू हिंसा आदि से संबंधित मामले उनके पास पहुंचे। राज लाली गिल ने कहा कि आज के समय में छोटी-छोटी बातें बर्दाश्त नहीं होती और सहनशीलता कम होती जा रही है। परिवारों में तनाव और झगड़े बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रमों की संख्या में वृद्धि भी हमारे समाज के लिए चिंता का विषय है। आयोग के उपनिदेशक निखिल अरोड़ा, एसडीएमएस की अध्यक्ष खुशप्रीत सिंह व अन्य, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी अदालत में मौजूद थे।

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