शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर सैलरी फर्जीवाड़े की आशंका पर निगम में सफाई-सीवरेज व दूसरे पदों पर काम कर रहे आउटसोर्स मुलाजिमों की फिजिकल वेरिफिकेशन करने के लिए 1 माह पहले बीते 23 अप्रैल तक डाक्यूमेंट्स लिए गए थे। मुलाजिमों से रिपोर्ट भी अंदरखाते ली जा चुकी है लेकिन हाजिरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने में देरी के कारण करीब 647 मुलाजिमों का 2 माह वेतन अटका हुआ है। शहर में साफ-सफाई न होने की एक वजह यह भी सामने आ रही है। सफाई कर्मी अंदरखाते नाराज चल रहे कि एक तो महज 9,300 रुपए हर माह वेतन के तौर पर दिया जाता है वो भी 2 महीने से लटकाकर रखा गया है। पहले बताया जा रहा था कि एसएस प्रोवाइडर कंपनी काम छोड़कर जा चुकी है, जिस कारण मुलाजिमों के वेतन भुगतान में देरी हो रही है। जबकि फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए पैन-आधार व दूसरे जरूरी डॉक्यूमेंट्स निगम के जनरल ब्रांच में जमा कराए जा चुके हैं। सुपरिंटेंडेंट की लापरवाही के कारण मुलाजिमों को सैलरी अब तक नहीं मिल पाई है। एडिश्नल कमिश्नर मुलाजिमों की सैलरी क्लियर कराने को लेकर हाजिरी रिपोर्ट पेश करने के लिए 3 बार आदेश जारी कर चुके है, मीटिंग भी बुलाई जा चुकी मगर वेतन कब तक सफाई सेवकों के खाते में पहुंच पाएगा, यह अब तक भगवान भरोसे ही नजर आ रहा है। अटेंडेंस लिस्ट सौंपने में देरी को लेकर वार्निंग लैटर भी जारी किए गए लेकिन विभागीय एक्शन जीरो रहा है। एडिश्नल कमिश्नर ने बीते 12 मई को आदेश जारी हुआ था कि 13 मई तक हर हाल में रिपोर्ट सौंपना सुनिश्चित करेंगे। इसके बाद दोबारा से आदेश जारी कर 16 मई के सायं 4 बजे तक रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद 19 मई को सुबह 10:30 बजे मीटिंग बुलाने का आदेश भी जारी हुआ। विभागों के एचओडी से लेकर जनरल ब्रांच के सुपरिंटेंडेंट की कार्यशैली का हाल यह आदेश बयां कर रहे कि कितने संजीदा हैं। निगम की पूर्व की कंपनी के दौरान आउटसोर्स पर 293 सफाई सेवक, 66 सीवरमैन, 47 स्प्रे-मैन, 50 क्लास-4 और अन्य कई छोटे-बड़े पदों पर कुल 647 से अधिक कर्मचारी थे।


