नया टेंडर अब तक नहीं:डायल-112 में ट्रांसपोर्टिंग का काम देखने वाली एबीपी कंपनी के हवाले कर दी इमरजेंसी सेवा

छत्तीसगढ़ में 7 साल से चल रही इमरजेंसी सेवाएं डायल-112 का हाल दिन ब दिन बेहाल होते जा रहा है। इस आपातकालीन सेवा का संचालन ऐसी कंपनी कर रही है जिसके भरोसे में केवल ट्रांसपोर्टिंग का काम था। कंपनी को तकनीकी काम करने का अनुभव नहीं है न ही उसके टेक्निकल एक्सपर्ट हैं। इस वजह से इसकी सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। पेट्रोलिंग कम होते जा रही है। जो गाड़ियां अभी फील्ड में हैं वे भी या तो कंडम हो चुकी हैं या 1 लाख किमी से ज्यादा चल चुकी हैं।
लगातार विरोध के बाद पुलिस मुख्यालय के अफसरों का कहना है कि डायल-112 को चलाने का ठेका जल्द सी-डैक कंपनी को दिया जाएगा। यह केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था है। कंपनी अभी देश के करीब एक दर्जन राज्यों में अपनी सेवाएं दे रही है, लेकिन वहां उसका प्रदर्शन औसत ही है। इसके बावजूद कंपनी को नया टेंडर दिया जा रहा है। राज्य सरकार कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर कंपनी को सीधे काम सौंप देगी। पिछले साल कंपनी के अधिकारी डायल-112 का काम देखने रायपुर आए थे। क्योंकि सरकार ने 2018 में टाटा और उससे जुड़ी एबीपी प्राइवेट लिमिटेड को प्रोजेक्ट चलाने का ठेका दिया था। 2023 में इसका अनुबंध खत्म हो गया था। इसके बाद 6-6 माह एग्रीमेंट को बढ़ाया जाता रहा। लेकिन पिछले साल अगस्त में टाटा ने प्रोजेक्ट करने से मना कर दिया। आनन-फानन में ट्रांसपोर्टिंग का काम देख रही एबीपी कंपनी को इमरजेंसी सेवा का काम दे दिया गया। यह कंपनी एक साल से काम देख रही है। जिकित्जा का टेंडर फाइनल होने के बाद रद्द
टाटा का अनुबंध खत्म होने पर पुलिस मुख्यालय ने 2023 में नया टेंडर जारी किया था। इसमें टीसीआईएल, बीवीजी इंडिया लिमिटेड, विंध्या टेली लिंक लिमिटेड, सीएमएस कंप्यूटर लिमिटेड और जिकित्जा हेल्थकेयर लिमिटेड कंपनियों ने भाग लिया था। पीएचक्यू की कमेटी ने जिकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड का टेंडर फाइनल किया। राज्य सरकार को जिकित्सा का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन शासन ने इस कंपनी को संचालन की मंजूरी नहीं दी। बाद में पूरा टेंडर रद्द कर दिया। अब दौड़ने लगेंगी मैदान में खड़ी 400 गाड़ियां
डायल-112 अभी राजधानी समेत 11 जिलों में चल रहा है। इसे 33 जिलों में चलाने की योजना है। इसके लिए 20 माह पहले 40 करोड़ की लागत से 400 बोलेरो खरीदी गई। सभी नई गाड़ियां अमलेश्वर स्थित तीसरी बटालियन के मैदान में धूल खा रही हैं। गाड़ी खरीदने के बाद आज तक इन्हें सड़क पर नहीं उतारा गया। पीएचक्यू टेंडर होने का इंतजार कर रही है। जब नई कंपनी को टेंडर मिलेगा तो उन्हें यह गाड़ी दी जाएगी। टेंडर नहीं हुआ तो आगे भी गाड़ियां ऐसे ही खड़ी रहेगी। कंट्रोल रूम में 120 और 11 जिलों में 720 कर्मी डायल-112 प्रोजेक्ट में अभी एबीपी कंपनी के 900 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे है। इसके कंट्रोल रूम में तीन शिफ्ट में कुल 120 कर्मचारी उपस्थित रहते हैं। वे लोगों का फोन रिसीव करने से लेकर फील्ड में तैनात टीम को संदेश पहुंचाने तक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राज्य के 11 शहरों में तकरीबन 240 गाड़ियां दौड़ रही है। इसमें तीन शिफ्ट में 720 ड्राइवर रहते हैं। कंपनी काम बंद करती है, तो स्टाफ को भी हटा दिया जाएगा। पुलिस सिर्फ उनकी सहायता के लिए है। इसमें आज तक पुलिस की स्थायी पोस्टिंग या भर्ती नहीं हुई है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *