भास्कर न्यूज | गिरिडीह पिछले चार वर्षों में गिरिडीह जिले की 61 हजार 426 महिलाओं को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला है। लेकिन इनमें से सिर्फ 20 प्रतिशत महिलाएं ही सिलेंडर रिफिल करवा पा रही हैं। बाकी 80 प्रतिशत महिलाएं अब भी लकड़ी और कोयले पर खाना बना रही हैं। शहर से सटे गांवों में महिलाओं को सस्ते दर पर कोयला मिल जाता है। वहीं जंगलों में बसे गांवों की महिलाएं लकड़ी से ही सुबह-शाम का खाना बना लेती हैं। जिससे केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। दूर-दराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं को अब गैस सिलेंडर भी महंगा लगता है। महिलाओं ने मुफ्त कनेक्शन यह सोचकर लिया था कि गैस सस्ता मिलेगा। लेकिन सिलेंडर लेते समय उन्हें 910 रुपए देने पड़ते हैं। कुछ दिन बाद बैंक खाते में सब्सिडी की राशि लौटती है। इस झंझट से परेशान होकर महिलाओं ने सिलेंडर भरवाना ही बंद कर दिया। अब हाल यह है कि कई घरों में सिलेंडर कोने में पड़े हैं। अब उपयोग में नहीं आ रहे है। शहर के बीबीसी रोड में रहने वाली श्रुति देवी ने बताया कि मुफ्त में कनेक्शन ले लिया था, उस वक्त सिलेंडर का दाम कम था, लेकिन अब सिलेंडर का दाम इतना अधिक हो गया है कि उससे सस्ता कोयला ही लगता है। इसलिए दो-तीन महीने में एक सिलेंडर सिर्फ इसलिए लेते हैं, ताकि कनेक्शन सरकार बंद न करवा दे। सिहोडीह में आम बागान के पास रहने वाली सोनिया देवी ने कहा कि सिलेंडर का उपयोग काफी कम करते हैं। पूजा और त्योहार में अधिक उपयोग होता हैै। इसलिए साल भर में तीन-चार सिलेंडर रिफिल करवाते हैं। बाकि दिन कोयले के चूल्हा पर भोजन बनाते हैं। पचंबा के पास परसाटांड़ में रहने वाली अनिता देवी ने बताया कि सिलेंडर खरीदने में 900 रुपए लगता है, उसके बाद खाते में राशि आती है, फिर राशि को निकालने के लिए बैंक जाना पड़ता है। इतना पैसा नहीं हो पाता है कि हर माह सिलेंडर खरीद सके। इसलिए कभी गैस पर खाना बनाते हैं, तो कभी चूल्हे पर। ऐसे में दो सिलेंडर में उनका एक साल गुजर जाता है। केंद्र सरकार कर रही है मॉनिटरिंग : गुलाम जिला आपूर्ति पदाधिकारी गुलाम समदानी ने बताया कि लगातार केंद्र सरकार इस योजना की मॉनिटरिंग कर रही है। हर एक लाभुकों को गैस का कनेक्शन दिया जा रहा है। लेकिन लोगों में गैस सिलेंडर रिफिलिंग नहीं कराया जाना एक बड़ी समस्या है। आपूर्ति विभाग की कोशिश होगी कि जिले के हर एक पीडीएस दुकानों से आम ग्रामीणों को गैस सिलेंडर रिफिलिंग को लेकर जागरूक किया जाएगा, ताकि गांव की महिलाओं को धुंए से होनी वाली परेशानी से निजात मिले।


