गुरदासपुर के मेजर तृप्तप्रीत सिंह को भारत सरकार ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। आज (रविवार को) गांव पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत हुआ। उनके घर पहुंचने पर ढोल की थाप पर स्वागत हुआ। लोगों व परिवारिक मेंबरों ने फूलों और नोटों के हार पहनाएं। उन्होंने 6 सफल ऑपरेशनों में 9 आतंकियों काे मार गिराया था। ऐसे दिया था ऑपरेशन को अंजाम मेजर तृप्तप्रीत सिंह कौर 34 राइफल्स को 4 जनवरी 2074 को शोपियां जिले के एक गांव में एक आतंकवादी की मौजूदगी के बारे में विशेष खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने टीम लीडर के रूप में मिशन की योजना बनाई और टारगेट तक पहुंचे। आतंकवादी को उसकी स्थिति छोड़ने के लिए मजबूर किया। लंबे समय तक गोलीबारी के बाद इंच-इंच आगे बढ़ते हुए ऑपरेशन में सफलता हासिल की। धैर्य बनाए रखा और गंभीर जानलेवा खतरे का सामना करते हुए एक घातक नजदीकी लड़ाई में कट्टर आतंकवादी को मार गिराया। बाद में मारे गए आतंकवादी की पहचान श्रेणी ‘ए’ के आतंकवादी के रूप में की गई। कर्तव्य की सीमा से परे विशिष्ट वीरता, अनुकरणीय नेतृत्व और निडरता प्रदर्शित करने तथा बिना किसी क्षति के एक कट्टर आतंकवादी को मार गिराने के लिए राष्ट्रपति द्वारा मेजर तृप्तप्रीत सिंह को “शौर्य चक्र” से सम्मानित किया गया। पिता बोले, “बहुत अच्छा लगा, मजा आ गया।” मेजर ने कहा कि छह साल पहले, लेफ्टिनेंट उमर फैयाज 2017 में शहीद हो गए थे। हमने शोपियां में आतंकियों के टॉप कमांडर को मारकर उसका बदला लिया था। यह पूरी यूनिट का ऑपरेशन था। यह हमारे लिए गर्व का पल था। मेजर के पिता का कहना था कि उन्हें बहुत अच्छा लगा है। मेजर ने बताया कि मेरे पिता ने ही आर्मी जॉइन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मुझे सैनिक स्कूल में दाखिल करवाया। इसके बाद मैं एनडीए से पास आउट हुआ। मेजर की मां ने कहा कि जब उनका बेटा आर्मी में गया था, तो बहुत अच्छा लगा था। जहां उनकी ड्यूटी लगी थी, वह वहां से जीतकर आया है। पत्नी बोली, “मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि मेरे पति ने इतना अच्छा काम किया है।”


