बदायूं में जामा मस्जिद या नीलकंठ मंदिर में सुनवाई टली:अगली सुनवाई 18 जनवरी को, मुस्लिम पक्ष बोला- सुप्रीम कोर्ट का आदेश है तो फिर बहस क्यों

बदायूं में नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले में आज मंगलवार सुनवाई होनी थी। लेकिन सुनावई टल गई है। अब अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी। पिछली सुनवाई में जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया था। जिसमें कहा था, जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश है तो फिर बहस में समय क्यों खराब किया जाए। इससे उलट नीलकंठ महादेव पक्ष के अधिवक्ताओं का कहना था, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह जिक्र कहीं नहीं है कि मामले की पोषणीयता पर सुनवाई नहीं हो सकती। बदायूं में नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले की सुनवाई सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अमित कुमार की कोर्ट में चल रही है। मुकदमे में वादी अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल हैं। उनकी ओर से साल 2022 में जामा मस्जिद में नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा दायर किया था। मस्जिद इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता ने अपने जवाब में यहां मंदिर के अस्तित्व को नकारा है। कोर्ट में सरकारी वकील की ओर से बहस पूरी हो चुकी है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट भी आ चुकी है। जबकि अब इंतजामिया कमेटी की ओर से बहस चल रही है। जिसके बाद नीलकंठ महादेव मंदिर पक्ष की ओर से बहस होगी। सभी बहस के बाद कोर्ट यह तय करेगा, यह मामला चलने योग्य है या नहीं। अब जानिए पूरा मामला… चार साल पहले दायर की गई याचिका 2 सितंबर, 2022 को बदायूं सिविल कोर्ट में भगवान श्री नीलकंठ महादेव महाकाल (ईशान शिव मंदिर), मोहल्ला कोट/मौलवी टोला की तरफ से एक याचिका दायर की गई। इसमें जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, ASI, केंद्र सरकार, यूपी सरकार, बदायूं कलेक्टर और प्रदेश के मुख्य सचिव को पार्टी बनाया गया। याचिका में दावा किया गया कि मौजूदा वक्त में बदायूं की जामा मस्जिद की जगह पर नीलकंठ महादेव का मंदिर था। दावा- शिवलिंग को हटाकर मस्जिद बनाई गई दावा किया जा रहा है कि मंदिर में यही शिवलिंग स्थापित था, जिसे मस्जिद बनाते समय हटा दिया गया। बाद में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजश्री चौधरी ने इस केस को लड़ने के लिए 5 प्रतिनिधि (याचिकाकर्ता) नियुक्त किए। इनमें महासभा के प्रदेश संयोजक मुकेश पटेल, अरविंद परमान एडवोकेट, ज्ञानेंद्र प्रकाश, डॉ. अनुराग शर्मा और उमेश चंद्र शर्मा शामिल हैं। 3 महीने में तय होगा केस सुनने लायक है या नहीं कोर्ट ने 5 लोगों के याचिकाकर्ता बनने की एप्लिकेशन स्वीकार कर ली। अब यही पांच लोग हिंदू पक्ष की तरफ से कोर्ट में उपस्थित हो रहे हैं। पिछले दो साल से कोर्ट में तारीख पर तारीख लग रही हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को सुना जा रहा है। माना जा रहा है, अगले 3 महीने में कोर्ट यह तय कर देगा कि यह केस आगे सुनने लायक है या नहीं। यह खबर भी पढ़ें… बदायूं में जामा मस्जिद या नीलकंठ मंदिर?:हिंदुओं का दावा- अल्तमश ने मंदिर ढहाकर बनाई, मुस्लिमों के पास मालिकाना हक के सबूत उत्तर प्रदेश में ज्ञानवापी, मथुरा जन्मभूमि और संभल जामा मस्जिद के बाद अब बदायूं की जामा मस्जिद चर्चा में है। हिंदू पक्ष ने इसे नीलकंठ महादेव मंदिर बताते हुए कोर्ट में दावा किया है। 10 दिसंबर को कोर्ट में सुनवाई है। दावा है- साल 1175 में मुस्लिम शासक शमसुद्दीन अल्तमश (इल्तुतमिश) ने मंदिर को जामा मस्जिद का रूप दिया था। हिंदू पक्ष ने ब्रिटिशकाल में लिखे गए गजेटियर और 144 साल पुरानी ASI की रिपोर्ट कोर्ट में जमा की है। पढ़ें पूरी खबर

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