चंडीगढ़ CAT ने एक्सीडेंट केस में दिए मुआवजे के आदेश:परिजनों को मिलेंगे 20 लाख, घर के काम को भी इनकम में माना

सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने एक एक्सीडेंट केस में परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा देने का फैसला सुनाया है। बाइक की टक्कर में महिला की मौत के बाद परिवार ने 35 लाख रुपए मुआवजा मांगा था। लेकिन दूसरी पार्टी ने घरेलू महिला कहकर क्लेम कम करने की अपील की थी। घरेलू महिला के संबंध में ट्रिब्यून ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बेशक कोई महिला घर का काम रही हो। लेकिन उसके काम को इनकम में गिना जाएगा। पत्नी की सेवा की तुलना किसी नौकरानी से नहीं की जा सकती। इसलिए अगर किसी महिला की सड़क हादसे में मौत हो जाती है, तो उसका परिवार मुआवजे का हकदार है। यह फैसला डेराबस्सी की सुखविंदर कौर के मामले में आया है। 6 साल पहले सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई थी। ट्रिब्यूनल ने उनके पति गुरबचन सिंह, दोनों बच्चों और माता-पिता को 20 लाख 6 हजार 300 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। गृहिणी 24 घंटे करती है परिवार की सेवा
कोर्ट ने कहा कि सुखविंदर कौर एक गृहिणी थी। वह घर के काम, बच्चों की देखभाल और परिवार को प्यार देने जैसे कई काम करती थी। यह सच है कि कुछ काम नौकरानी भी कर सकती है, लेकिन पत्नी सिर्फ काम नहीं करती। वह अपने पूरे मन से परिवार की सेवा करती है। ऐसे में उसकी मौत से परिवार को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई मुआवजे से होनी चाहिए। ट्रिब्यूनल ने 9 हजार रुपए महीना मानी आय
ट्रिब्यूनल ने हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए सुखविंदर कौर की आय 9 हजार रुपए प्रति महीने मानी। कोर्ट ने कहा कि गृहिणी का काम घर चलाने में बहुत अहम होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 3 साल में 10% इंक्रीमेंट के हिसाब से तय की लास्ट इनकम
कोर्ट ने यह भी कहा कि मृतका के परिवार को अंतिम संस्कार के लिए 15 हजार, मानसिक दुख के लिए 40 हजार और बाकी नुकसान के लिए 15 हजार रुपए का मुआवजा भी मिलना चाहिए। यह राशि हर 3 साल में 10% इंक्रीमेंट के हिसाब से बढ़ाई जानी चाहिए। परिवार ने याचिका में बताया कि यह हादसा एक बाइक सवार की लापरवाही से हुआ था। उस वक्त सुखविंदर कौर की उम्र 32 साल थी। परिवार ने कोर्ट में 35 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी। ट्रिब्यूनल ने मामला सुनकर 20 लाख रुपए से ज्यादा मुआवजा देने का आदेश दिया।

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