प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को गोपनीय प्रतिवेदन यानी सीआर भरने का सिस्टम राज्य सरकार ने बदल दिया। उन्हें अब श्रेणी पर 1 से 10 अंक परफॉर्मेंस के आधार पर नहीं मिलेंगे। खास बात यह है कि कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र या प्रशिक्षण पत्र पर अंक नहीं दिए जाएंगे। संविदा पर नियुक्त अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों का मूल्यांकन नहीं करेंगे। यदि कोई अफसर जो प्रतिवेदक, समीक्षक या स्वीकारकर्ता अधिकारी है और सेवानिवृत्त या पद त्याग करता है, तब वह एक महीने के अंदर अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की सीआर पर अभिमत अंकित कर सकेगा। मालूम हो कि दैनिक भास्कर ने 10 मई के अंक में प्रमुखता से सीआर लिखने का सिस्टम बदलने की जानकारी पाठकों को दे दी थी। जीएडी के अनुसार सीआर में दर्ज परफॉरमेंस के आधार पर ही कर्मचारी की आगे की सेवा कैसी होगी यह तय होगा। मूल्यांकन प्रतिवेदन से पदोन्नति, पदावनति, अनिवार्य सेवानिवृत्ति, सेवानिवृत्ति के बाद पुनर्नियुक्ति प्रभावित होगी। यदि कोई कर्मचारी को ज्वाइन किए एक साल से कम हुआ है, तो उसे ज्वाइनिंग तिथि से 31 मार्च तक सीआर भरनी होगी। यदि कोई कर्मचारी अपने सक्षम अधिकारी द्वारा प्रदान किए अंकों या टीप से संतुष्ट नहीं है तो वह इसके लिए अपील कर सकेगा। सीआर की अवधि 1 अप्रैल से 31 मार्च होगी। ऐसे तय किए जाएंगे पैरामीटर कार्य पूरा करना, कार्य की गुणवत्ता, आपवादिक या अप्रत्याशित कार्य, कार्य की अभिरूचि, जिम्मेदारी की भावना, समग्र आचरण और व्यक्तित्व, भावनात्मक स्थिरता, संप्रेषण कौशल, विधि, नियमों, प्रक्रियाओं, आईटी कौशल व स्थानीय मानकों की जागरूकता, अनुकूल योजना बनाने की क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता, पहल, समन्वय क्षमता आदि। खास बातें


