छत्तीसगढ़ के कांकेर में अचानक हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धान की फसल कटाई के समय खेत में ही झड़ने लगी है। सूखे धान की फसल भी गिर रही है। किसान जब बची हुई फसल को राइस मिलर्स के पास ले जा रहे हैं, तो उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। इस साल किसानों को बीज से लेकर खाद तक सभी चीजों की कीमतों में वृद्धि का सामना करना पड़ा। दवाई छिड़काव और अन्य जरूरतों को पूरा करने के बाद जल स्रोत कम हो गए। नदियों से भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। पानी की कमी से धान की फसल सूखने लगी थी। किसानों ने मुश्किल से आधी फसल को बचाया, लेकिन अब अनावश्यक बारिश से वह भी खराब हो रही है। किसानों की स्थिति यह है कि अगर खेत में लगाई गई लागत भी निकल जाए तो वह राहत की बात होगी। इसके अलावा आम की फसल भी प्रभावित हुई है। पहले आधी फसल तूफान से झड़ गई थी। अब बची हुई फसल में कीट लगने का खतरा बढ़ गया है। इस साल बाजार में देसी आम की जगह विदेशी किस्मों के आम ज्यादा दिख रहे हैं।


