कांकेर में वट सावित्री व्रत पर सुहागिनों ने की पूजा:पति की दीर्घायु के लिए की कामना, फल-फूल और सुहाग सामान से की अर्चना

वट सावित्री पर्व पर सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना की। दसपुर की माधुरी साहू ने बताया कि वट सावित्री पर्व पर पुराने वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि जितना पुराना वट वृक्ष होता है, पति की आयु उतनी ही लंबी होती है। खुशबू साहू और केवरा साहू ने पौराणिक कथा साझा की। उन्होंने बताया कि सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा के लिए वट वृक्ष के नीचे तपस्या की थी। इसी तपस्या के बल पर वह अपने पति को यमराज के चंगुल से वापस ला सकी थीं। भारती यादव और योगेश्वरी सोनी ने बताया कि महिलाएं सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुट गईं। पूजा में फल-फूल और सुहाग का सामान चढ़ाया गया। वट वृक्ष में धागा लपेटकर विधि-विधान से पूजा की गई। शीतला माता मंदिर के पुजारी खिलावन प्रसाद माली ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी सुबह से महिलाएं पूजा के लिए पहुंच रही हैं। यह पर्व सावित्री द्वारा अपने पति को यमराज से वापस लाने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। पति की लंबी आयु के लिए रखा व्रत भानुप्रतापपुर नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में सोमवार को सुहागिन महिलाओं ने आस्था के साथ वट सावित्री व्रत रखा। इस अवसर पर महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख-शांति की कामना करते हुए बरगद (वट) वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना की। नगर में जहां-जहां बरगद के पेड़ हैं, वहां महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह परिसर में भी बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा करती नजर आईं। महिलाओं ने बताया कि वट सावित्री व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस पाया था। तभी से सुहागिन महिलाएं यह व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं ताकि उनके पति को लंबी उम्र और अच्छा स्वास्थ्य मिले। सत्यवान की कथा सुन सात बार की वट की परिक्रमा कांकेर जिले के ग्राम बेवरती और पटौद में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने वट सावित्री व्रत रखा। महिलाओं ने सुबह से निर्जला व्रत रखते हुए दोपहर को विधिपूर्वक पूजा की। कोदाभाट गांव में पूजा के बाद सत्यवान-सावित्री की कथा सुनाई गई। इसके बाद व्रती महिलाओं ने वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा कर कुंवारी धागा लपेटा और सिंदूर अर्पित कर पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की कामना की।

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