भास्कर न्यूज | बालोद एक ओर मानसून की दस्तक अगले माह होने का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है। वहीं दूसरी ओर बाढ़ से राहत दिलाने बनी प्लानिंग फाइल में ही कैद है। यह स्थिति तब है, जब शासन स्तर से राशि मंजूर हो चुकी है। डौंडीलोहारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिपरा से किल्लेकोड़ा मार्ग के बीच जुझारा नाला में 65 मीटर लंबा और 7.5 मीटर चौड़ा पुल निर्माण के लिए सेतु विभाग की ओर से तीसरी बार टेंडर जारी की गई है। लेकिन अब तक सिर्फ एक ही आवेदन जमा हुआ है। इस स्थिति में मामला अटका हुआ है। इसके पहले भी दो बार टेंडर जारी हो चुका है लेकिन एक ही आवेदन आने से मामला अटका रहा। यह स्थिति तीसरी टेंडर में भी है। लिहाजा कब तक एजेंसी तय होगी और कब से काम शुरू होगा। इस संबंध में कोई बता नहीं पा रहे हैं। सेतु विभाग के एसडीओ टीएन संतोष खामोश हैं। लगातार तीन बार टेंडर जारी होने के बाद यह स्थिति है, ऐसे में शासन स्तर से मार्गदर्शन लेने की जरूरत है। लेकिन राहत दिलाने के लिए विभागीय, जिला प्रशासन के अफसर से लेकर जनप्रतिनिधि कुछ कर नहीं पा रहे है। जिसका खामियाजा मानसून सीजन में क्षेत्र के लोगों को भुगतना पड़ेगा। राहत नहीं मिल पाएगी। दो साल पहले प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है सेतु विभाग के अनुसार दो साल पहले ही पुल निर्माण के लिए शासन स्तर से प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। दावा किया जा रहा है कि राशि लैप्स नहीं हुई है, सिर्फ एजेंसी तय करना बाकी है। सेतु विभाग के अनुसार पहली की तरह दूसरी बार जब टेंडर जारी हुआ था, तब एक ही एजेंसी ने आवेदन किया। इस स्थिति मंे एजेंसी फाइनल नहीं हो पाया और प्रक्रिया अटक गई। नियमों का हवाला देकर तर्क दे रहे हैं कि अगर दो एजेंसी आवेदन करते तो इसमें एक को फाइनल करते। लेकिन ऐसी स्थिति ही नहीं आई। तीसरी बार टेंडर जारी किए। सेतु निर्माण विभाग दुर्ग संभाग को िदया िजम्मा, 15 गांवों के लोग इससे जुड़े हुए हैं पुल निर्माण पूरा कराने के लिए शासन ने 2 करोड़ 11 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। अगर इस साल या अगले माह से काम भी शुरू होता है तो मानसून सीजन में लोगों को राहत नहीं मिल पाएगी। पुल नहीं बनने की वजह से मानसून सीजन में 15 गांव के लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है। शासन ने काम पूरा कराने की जिम्मेदारी सेतु निर्माण विभाग दुर्ग संभाग को दी है। जुझारा नाला के पुराने पुल में हर साल मानसून सीजन में बाढ़ की स्थिति बन जाती है। इस वजह से 15 गांव के लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुराना पुल ओवरफ्लो होने से ग्रामीण होते हैं प्रभावित बड़ा व ऊंचा पुल बनाने की मांग चिपरा, किल्लेकोड़ा सहित आसपास गांव के ग्रामीण करते आ रहे है। पुल नहीं बनने से ग्राम चिपरा, किल्लेकोड़ा, जुनवानी, खोलझर, नलपानी, झरन मरकामटोला, पिंगाल, लुरकाझर, गिधाली, बकलीटोला, भर्रीटोला, घुर्राटोला, शिकारीटोला व आसपास के 15 से ज्यादा गांव के लोगों को बाढ़ में परेशानी होती है।


