छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूप नारायण सिन्हा ने कोंडागांव में योग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल आसन तक सीमित नहीं है। यह स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की विद्या है। योग आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि यदि मनुष्य योग को आत्मसात कर ले, तो वह न केवल शरीर को स्वस्थ रख सकता है, बल्कि जीवन को भी अनुशासित बना सकता है। उन्होंने योग को प्रकृति से उत्पन्न एक सम्यक साधन बताया और कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शैली है। अनुशासित जीवनशैली से जीवन में सुधार संभव सिन्हा ने स्वस्थ जीवन के लिए चार सूत्र बताए। ये हैं – राशन, आसन, भाषण और शासन। उनका कहना है कि सही खानपान, नियमित योगाभ्यास, संयमित वाणी और अनुशासित जीवनशैली से जीवन में सुधार संभव है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर से ही समाज और धर्म की सेवा की जा सकती है। योग आयोग की योजनाओं के बारे में सिन्हा ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। आयोग योग को शहरों से निकालकर ग्राम पंचायतों तक ले जाएगा। इसके लिए प्रदेश के छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रशिक्षक तैयार किए जा रहे हैं। हर जिले में योग दर्शन कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। विचार गोष्ठियां और प्रशिक्षण सत्र भी होंगे। वनांचल क्षेत्रों के जनजातीय समुदायों को भी योग से जोड़ा जाएगा। सिन्हा ने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री विष्णु साय के नेतृत्व में स्वस्थ भारत के लिए योग को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।


