शौचालय बन गए गोदाम, खुले में शौच जाते हैं लोग, नहर भी अधूरी

जंघासी पंचायत प्रखंड मुख्यालय से दूरी 22 किलोमीटर साक्षरता : 62% जनसंख्या : 8600 कनेक्टिविटी सड़क मार्ग से जीप, टेंपो, निजी वाहन से जा सकतें हैं प्रसिद्ध शिव पहाड़ी नामक धार्मिक स्थल है। यहां हर साल मकर संक्रांति पर मेला लगता है। सुधीर सिंह|पाटन पाटन प्रखंड की जंघासी पंचायत आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। पंचायत में दो गांव जंघासी और ईमली शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने सैकड़ों शौचालय अब गोदाम बन चुके हैं। ग्रामीण इनमें गोइठा और अन्य सामान रखते हैं। लोग आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। ठेकेदारी संस्कृति के कारण शौचालय निर्माण सिर्फ दिखावा बनकर रह गया। कई शौचालय के दरवाजे भी उखड़ गए हैं। पंचायत में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है। ग्रामीणों को इलाज के लिए किशुनपुर या मेदिनीनगर जाना पड़ता है। शिक्षा की स्थिति भी खराब है। पंचायत में सिर्फ आठवीं तक की पढ़ाई होती है। बच्चों को बाहर जाना पड़ता है। इससे खासकर लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। यहां के अधिकतर लोग खेती पर निर्भर हैं। हरा साग और प्याज की खेती होती है। इनकी मांग आसपास के बाजारों में है। इसके बावजूद सिंचाई की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। गर्मियों में चापाकल और कुएं सूख जाते हैं। किसान सिर्फ बारिश पर निर्भर रहते हैं। पंचायत की सीमा से दो नदियां बहती हैं। जिजोई नदी पर बांध बनाकर अन्य गांवों को नहर से पानी दिया जा रहा है। लेकिन जंघासी और ईमली को इससे वंचित रखा गया।

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