सफाई का सच:6 साल में सफाई पर 269 करोड़ खर्च, फिर भी स्वच्छता के हर टेस्ट में रायपुर फेल

पूरे देश में शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 के सर्वे की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब रिजल्ट का इंतजार है। पिछले 6 साल में रायपुर एक बार भी टॉप 5 में जगह नहीं बना सका है। जबकि इस दौरान सफाई पर 269 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। इतना ही नहीं, स्वच्छता में पिछड़ने के बाद भी अभी तक कमियों को दूर करने की कोई ठोस रणनीति नहीं बन पाई है। राजधानी में कचरा कलेक्शन से लेकर प्रोसेसिंग तक गाइडलाइन का हर स्तर पर उल्लंघन हो रहा है। लिहाजा अच्छी रैंक भी नहीं आ पा रही है। {ज्यादातर वाहनों में मिक्स कचरे को अलग-अलग नहीं किया जा रहा
{6 साल में शहर की आबादी 13 लाख से बढ़कर 15 लाख हुई, लेकिन 255 गाड़ियों से ही घरों से कचरा उठा रहे
शहर सरकार ने रामकी को वर्ष 2018 में कचरा कलेक्शन और प्रोसेसिंग का काम सौंपा था। तब 1 टन कचरा कलेक्शन से प्रोसेसिंग तक के लिए 1275 रुपए देना तय हुआ था। लेकिन, रामकी ने काम शुरू करने के बाद निगम से 2200 रुपए प्रति टन के हिसाब से पेमेंट लिया। इस तरह रोज 550 टन कचरे के हिसाब से तय रेट की तुलना में 925 रुपए प्रति टन ज्यादा का पेमेंट हुआ। इस तरह एजेंसी को करीब 100 करोड़ रुपए ज्यादा भुगतान किया गया। निगम के एक अफसर के मुताबिक सालाना 18.56 करोड़ रुपए का अतिरिक्त पेमेंट रामकी को किया गया है। पर कचरा कलेक्शन से लेकर खंती में डंपिंग तक गीले और सूखे कचरे को अलग नहीं किया जा रहा है। 1. कलेक्शन: गाड़ी में सूखा-गीला कचरा अलग करने के लिए सेग्रीगेटर ही नहीं
ये करना ​था: कचरे को सोर्स पॉइंट यानी जहां से लिया जा रहा है, वहीं अलग कर गाड़ियों में लेना है।
ये हो रहा: राजधानी में घरों व दुकानों से कचरा लेने गाड़ियां आ रही हैं। उनमें कूड़े को अलग करने का चैंबर नहीं है। बीते 6 साल में शहर की आबादी 13 लाख से बढ़कर 15 लाख हो गई है, पर गाड़ियां नहीं बढ़ाई गई। 255 गाड़ियां ही चल रही है। कैसे साफ हो रायपुर: एजेंसी गाइडलाइन नहीं मान रही 2. कचरे के ट्रांसपोर्टेशन का मामला ये करना था : ट्रांसफर स्टेशन पर छोटी गाड़ियों से कंप्रेसर में ट्रांसफर करते वक्त कचरा जमीन पर नहीं गिरना चाहिए।
ये हो रहा: राजधानी के सबसे बड़े ट्रांसफर स्टेशन बूढ़ा तालाब में कलेक्शन गाड़ियों से कंप्रेसर में डालते वक्त कचरा जमीन पर फैल रहा है। साइंटिफिक लैंडफिल एरिया संकरी तक ले जाते वक्त इसी तरह ये कचरा फैलते हुए जाता है। 3. प्रोसेसिंग के लिए सेग्रीगेशन व्यवस्था ये करना था : प्रोसेसिंग के लिए हर स्तर पर कचरा सूखा और गीला अलग होना चाहिए
ये हो रहा: कचरे से खाद और दूसरे उत्पाद बन सके, इसके लिए हर स्तर पर कचरा अलग होना जरूरी है। ट्रांसफर पॉइंट पर भी कचरे को अलग करने की व्यवस्था हो। पर शहर में ट्रांसफर पॉइंट से लैंडफिल तक कचरा मिक्स जा रहा है। इससे एजेंसी के 100% प्रोसेसिंग के दावे की पोल खुलती है।

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