लुधियाना| जवद्दी टकसाल में आयोजित साप्ताहिक नाम सिमरन कार्यक्रम में संत बाबा अमीर सिंह जी ने संगत को आत्मचिंतन, नाम जप और ईश्वर के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति ‘मैं’ की भावना से बंधा है, तब तक उसके कर्मों में न मिठास है, न शांति। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि अशांति को खोजने वाला प्रेमी जब स्वयं को भूल गया, तभी उसे सच्ची शांति मिली। बाबा जी ने समझाया कि सच्ची मिठास परमात्मा के आदेशों में है, जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने संगत को आह्वान किया कि अपने कर्मों से ‘मैं’ को हटाकर उन्हें परमेश्वर को समर्पित करें, हरि नाम का ध्यान करें और सांसारिक इच्छाओं से मुक्त होकर केवल नाम दान की याचना करें।


