जप से नहीं, भाव से भक्ति होती है; राम नाम में अडिग रहना जरूरी

भास्कर न्यूज | लुधियाना श्री राम शरणम् श्री राम पार्क में आयोजित साप्ताहिक सत्संग में संत अश्वनी बेदी ने कहा कि भक्ति में दृढ़ विश्वास, अविचल निश्चय और अटूट आस्था सबसे जरूरी है। पूज्य स्वामी सत्यानंद जी महाराज के उपदेशों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वास अटूट होना चाहिए कि हमारा कल्याण केवल भगवान राम ही करेंगे। उन्होंने गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि जो भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान का स्मरण करता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। संत बेदी ने कहा कि दिनभर जप करना आवश्यक नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन जरूरी है। जैसे कोई पतिव्रता स्त्री हर वक्त पति के साथ नहीं रहती, फिर भी उसका समर्पण बना रहता है, वैसे ही भक्ति में भी भाव प्रमुख होता है। उन्होंने कहा कि भक्त का विश्वास बालक की तरह होना चाहिए, जैसा बच्चा भूख लगने पर केवल मां की ओर देखता है, किसी और पर नहीं। उन्होंने कहा कि राम नाम की साधना तभी फलदायी होती है जब उसमें पूरा विश्वास हो। पूरा परिसर राम नाम से गूंज उठा। अगर विश्वास अधूरा है तो साधना भी अधूरी रह जाती है। उन्होंने समझाया कि भगवान को बालक बनकर पुकारना चाहिए, क्योंकि विनम्रता से किया गया आह्वान ही प्रभु को प्रिय होता है। संत ने कहा कि भक्त का विश्वास अडिग होना चाहिए। अगर किसी मूर्ति या नाम ने हृदय में स्थान बना लिया है, तो उसमें किसी अन्य के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। सभा में राज मित्तल, टीटू पायलट, गुलाब राये, जीवन गुप्ता, सुनील महरा, सुमन जैन, सुदर्शन जैन, पवन खरबंदा, वरिन्दर जैन, आशु जैन, राज गुप्ता और रामेश्वर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साधक मौजूद रहे।

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