दहेज प्रथा समाप्त करने, परिवार को कर्ज से मुक्ति दिलाने कराते हैं आदर्श विवाह

आर्थिक तंगी दूर करने, परिवार को कर्ज से मुक्ति दिलाकर सामाजिक बदलाव लाने व रूढ़िवादिता को खत्म करने के उद्देश्य से हरदिहा साहू समाज ने आदर्श विवाह कराने का निर्णय लिया है। वर्ष 2016 से अब तक हर साल आदर्श विवाह करवाकर समाज की ओर से अच्छी पहल की जा रही है। प्रदेश के 4 जिले बालोद, दुर्ग, धमतरी व रायपुर में 2016 से नियम बनाकर यह सकारात्मक पहल करते आ रहे हैं। वर्ष 2016 से अब तक समाज के लगभग ढाई हजार जोड़ों का आदर्श विवाह हो चुका है। इसमें गरीब से लेकर अमीर सभी वर्ग शामिल है। अमीर हो या गरीब सबके लिए एक कानून लागू किया गया है। घर के बजाय सभी को सामूहिक आदर्श विवाह कराना है। सामूहिक मंडप में 7 फेरे लेकर शादी का रिवाज निभाते हैं। इस नियम मंे सामाजिक लोग सहभागिता भी दे रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष त्रिलोकी साहू ने बताया कि इस साल बालोद जिले के कुलिया गांव मंे दो बार सामूहिक आदर्श विवाह कार्यक्रम हो चुका है। पहली बार आयोजित कार्यक्रम में 36 और दूसरी बार आयोजित कार्यक्रम में 29 जोड़े परिणय सूत्र में बंध चुके हैं। कुलिया के अलावा रायपुर में 4 बार आयोजित कार्यक्रम में 400 और धमधा में 85 जोड़े का आदर्श विवाह हुआ है। समाज से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए समाज के प्रदेशाध्यक्ष त्रिलोकी साहू 7987031384 से संपर्क किया जा सकता है। समाज के बारे में… भेदभाव दूर करने अफसर हो या किसान सभी वर्ग के लिए एक ही नियम लागू, एक ही मंडप में शादी समाज का फोकस… आर्थिक तंगी दूर करना, दिखावा, फिजूलखर्च, रूढ़िवादिता को खत्म करना और सामाजिक बदलाव छत्तीसगढ़ में इस समाज के 3 लाख से ज्यादा लोग निवासरत हैं। सामूहिक विवाह कराने का मुख्य उद्देश्य दहेज प्रथा को पूरी तरह से समाप्त करना है। समाज दहेज के खिलाफ है। बिना किसी लेन-देन के शादी करवाते हैं और इस नियम को अपने समाज में कड़ाई से लागू भी किया गया है। जिसका पालन प्रदेश के अन्य जिलों में भी चरणवार होगा। सामूहिक विवाह में एक साथ एक मंडप में कई जोड़े सात फेरे लेते हैं। दुल्हा व दूल्हन दोनों पक्ष के परिजन, मेहमान इस शादी में घराती और बाराती की भूमिका निभाते है। सामाजिक पदाधिकारियों के अनुसार इस पहल से तलाक के मामले कम आ रहे हैं।

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