स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट बंद होते ही राजधानी रायपुर में जिन योजनाओं पर काम चल रहा था, उसे अधूरा छोड़कर ठेकेदार गायब हो गए हैं। 27 करोड़ से तीन तालाबों के पानी को साफ करने ट्रीटमेंट प्लांट बना रहे थे। इसका केवल स्ट्रक्चर खड़ा कर छोड़ दिया गया है। करीब तीन महीने से प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है। शहर में 10 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण का काम चालू किया गया। उसी प्रोजेक्ट में 3 अलग-अलग सड़कों के किनारे प्रतिमाएं बनाई जा रही थीं। जैसे ही प्रोजेक्ट बंद होने की सुगबुगाहट शुरू हुई ठेकेदार इसका काम भी अधूरा छोड़कर चला गया। कहीं कहीं तो केवल रंगरोगन का काम बाकी था। हद तो ये है कि जो प्रोजेक्ट पूरे हो चुके उनका मेंटेनेंस की जिम्मेदारी अब तक किसी को नहीं सौंपी गई। नतीजा गार्डन और तालाबों के किनारे किए गए सौंदर्यीकरण टूट-फूट व अंधेरा छा गया है। भास्कर ने स्मार्ट सिटी के अधूरे और पूरे हो चुके प्रोजेक्ट की पड़ताल की। पहले ही दो साल लेट, अब काम बंद महाराजबंध, खोखो और नरैया तालाब के पानी का साफ करने इसके किनारे ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का 27 करोड़ का प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इसके तहत तालाब में गिरने वाले नाले के पानी को एसटीपी में साफ करना था। ताकि पानी साफ होकर तालाब में जाए। ये प्रोजेक्ट अगस्त 2023 में शुरू होना था। अब तक केवल स्ट्रक्चर खड़ा हुआ है। मशीन का अता पता नहीं। ये प्रमुख प्रोजेक्ट जो पूरे हो गए लेकिन मेंटेनेंस नहीं


