भास्कर न्यूज | राजनांदगांव पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पंचगव्य डॉक्टर एसोसिएशन का राज्य स्तरीय चतुर्थ पंचगव्य चिकित्सा सम्मेलन हुआ। मुख्य वक्ता पंचगव्य विद्या पीठम कांचीपुरम तमिलनाडु के संस्थापक और गव्य सिद्ध आचार्य डॉ. निरंजन वर्मा गुरुजी रहे। उन्होंने गौ विज्ञान और पंचगव्य चिकित्सा पर जानकारी दी। मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर सिंह पटेल थे। डॉ. वर्मा ने कहा कि गाय की रक्षा भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है। 1945 में भारत में 34 करोड़ गाय हुआ करती थी लेकिन अब सिर्फ 4-5 करोड़ हैं। गाय की उपयोगिता खत्म करने से यह स्थिति बनी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भारतीय गोवंश की संख्या अधिक है पर वह सड़कों पर घूम रही है। पशु मेलों में 98 प्रतिशत कसाई और सिर्फ 2 प्रतिशत किसान पहुंचते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से पशु मेले बंद करने की मांग की है। गौ शालाओं में हो रहे भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त की। सरकार से किसानों से चारा खरीदने और गौ शालाओं को चारा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया। इससे किसान चारा नहीं जलाएगा और आमदनी होगी। डॉ. वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में स्थानीय गौ वंशों के कारण समवृष्टि होती है।


