कोरबा जिले में एनटीपीसी के राखड़ डैम से उड़ने वाली राख से परेशान ग्रामीण पिछले तीन दिनों से बांध के पास टेंट लगाकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं। मांगों की अनदेखी के कारण ग्रामीणों ने 5 जून को बांध का काम रोकने का निर्णय लिया है। एनटीपीसी प्रबंधन ने धनरास गांव में राखड़ बांध के निर्माण के लिए आसपास के गांवों के किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था। प्रभावित किसानों से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन समझौते और शर्तों के आधार पर दी थी। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने कहा कि 7 सूत्रीय मांगों के पूरी नहीं होने तक आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे। राखड़ उड़ने की परेशानी से निजात दिलाने, प्रभावित परिवारों के बेरोजगार युवाओं को राखड़ में प्रभावितों के वाहनों को किराए पर रखने, पूर्व की तरह राखड़ उड़ने से प्रभावित ग्रामीणों को क्षतिपूर्ति राशि देने समेत अन्य मांगें शामिल हैं। कई गांव के ग्रामीण प्रभावित डैम से उड़ने वाली राख से धनरास, पुरैनाखार, छुरीखुर्द, झोरा, घोरापाठ, घमोटा और लोतलोता के ग्रामीण प्रभावित हैं। राखड़ की सीपेज से कृषि योग्य भूमि दलदल बन गई है। कई किसान धान की फसल नहीं ले पा रहे हैं। संबंधित विभाग से कार्रवाई की मांग 28 अक्टूबर 2024 को एनटीपीसी प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में समझौता हुआ था। कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने धरनास्थल का दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को जायज बताते हुए संबंधित विभाग से कार्रवाई की मांग की है।


