सूद के नाम पर जबरदस्ती वसूली करने वाले तोमर परिवार के सदस्यों पर पुलिस की कार्रवाई तेज होती जा रही है। पुलिस का दावा है कि ब्याज के नाम पर जो पैसा वसूला किया जाता उसे वीरेंद्र, रोहित और दिव्यांश तोमर रिश्तेदारों के बैंक खातों में जमा करवाते हैं। इस वजह से तोमर परिवार के कई सदस्यों को जांच के घेरे में रखा गया है। कुछ सदस्यों से पूछताछ की जा रही है। वीरेंद्र और रोहित अभी भी फरार हैं अलबत्ता पुलिस ने उनके भतीजे दिव्यांश तोमर को गिरफ्तार किया हैै। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
अब तक इस मामले में 35.10 लाख, 734 ग्राम गोल्ड ज्वेलरी, 125 ग्राम चांदी के जेवर, बीएमडब्ल्यू, थार, ब्रेजा, लेन-देन का रजिस्टर, जमीनों के दस्तावेज, नोट गिनने की मशीन, पांच तलवार, एक रिवाल्वर, एक पिस्टल, जिंदा एवं आवाजी कारतूस जब्त किया जा चुका है।
तोमर परिवार से पीड़ित जयदीप बनर्जी (50 साल), मनीष साहू (36) और नासिर बख्श (45) ने पुलिस को बताया कि रोहित तोमर, वीरेंद्र तोमर और उसके परिवारवालों ने उन्हें जो रकम उधार दी उसके बदले में वे कोरा और भरे हुए चेक के साथ ही कोरे स्टांप पेपर में जबरदस्ती हस्ताक्षर करवाते थे। मूल से ज्यादा ब्याज वसूल करने के बाद भी पैसों की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी देते थे। कई बार तो इतना डराया जाता था कि जमीन का रजिस्ट्री तक करवा ली जाती थी। कई साल तक ब्याज की रकम कच्चे में लेते रहते थे। अधिकतर बार सूद की रकम अपने कर्मचारी योगेश के अलावा परिवार की महिलाओं शुभ्रा तोमर और नेहा तोमर के खाते में जमा करवाते थे। इनका खुद का बड़ा ग्रुप था, जिसमें परिवार के सभी पुरुष सदस्य शामिल थे। वे अक्सर कर्जा लेने वालों को पिस्टल दिखाकर डराते थे। कई लोगों से उनकी जमीन की जबरन रजिस्ट्री करवायी। इस मामले में वीरेंद्र और रोहित फरार हैं। लेकिन पुलिस ने उनके रिश्ते भाई अनिल तोमर के बेटे दिव्यांश तोमर को उसके घर सांई विला भाठागांव से गिरफ्तार किया है।
बैंक वाले भी डर गए तोमर परिवार से
वीरेंद्र सिंह तोमर का दबदबा इतना था कि बैंक वाले भी उससे डरते हैं। उसके पास जो बीएमडब्ल्यू कार थी वो यूको बैंक पेंशनबाड़ा शाखा से 1 फरवरी 2016 को 45 लाख रुपए लोन लेकर खरीदी गई थी। तोमर ने इसकी किस्त तक नहीं अदा की। इसलिए बैंक ने 31 मई 2019 को उसे एनपीए घोषित कर लोन वसूली के लिए जबलपुर कोर्ट में मामला दायर किया। जबलपुर कोर्ट ने रायपुर आरटीओ को 3 जनवरी 2025 को कार जब्त कर बैंक को सौंपने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बावजूद कार वीरेंद्र के पास ही रही। बैंक वालों को जब पता चला कि पुलिस वाले उस कार को जब्त कर रहे हैं तो उन्होंने चिट्ठी लिखकर कहा है वो कार बैंक को दी जाए ताकि उसकी ई-नीलामी कर लोन की रकम वसूल की जा सके।


