भांकरोटा अग्निकांड:यू-टर्न पर 5 जवान तैनात, हर मिनट घूम रहे कंटेनर, सामने से आते वाहनों की रफ्तार देख रूह कांप उठी

रात के 12 बजे हैं और मैं उस भांकरोटा डीपीएस कट पर खड़ा हूं, जहां 20 दिसंबर को सुबह 5:30 बजे एलपीजी गैस टैंकर और कंटेनर की टक्कर से हुए अग्निकांड में अब तक 15 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। यहां दोनों ओर की दुकानें शाम को ही बंद होने से पसरे सन्नाटे को तेज रफ्तार से गुजरते वाहन तोड़ रहे थे। अजमेर की ओर जाने वाले ट्रक-कंटेनर जहां हर मिनट यूटर्न ले रहे थे, वहीं इस खतरनाक कट पर और हादसे न हो, इसलिए सर्द रात में भी 5 जवान तैनात दिखे, जो यूटर्न लेने वाले भारी वाहनों के बीच सामने से आते वाहनों को रोकने की कोशिश करते हैं। भांकरोटा कट पर सर्द हवा से ज्यादा टर्न लेते वाहनों के सामने से 100 की स्पीड से गुजरे वाहनों को देख कांप रही थी। रात डेढ़ बजे तक वहां ऐसी ​ही स्थिति रही। क्लोअर लीफ नहीं बने तब तक कैट आई व रंबल स्ट्रिप जरूरी कट से पहले हाईवे पर कट होने का संकेत बोर्ड नहीं है। आग से सिग्नल भी जल चुके हैं, जिससे अजमेर की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को खतरे का पता नहीं होता। खास तौर पर रात में। ऐसे में वाहनों की रफ्तार तेज ही रहती है। पुलिस ने खतरे को भांपते हुए हैलोजन लाइटें और ब्लिंकर लगाए हैं। बिजली विभाग ने सप्लाई नहीं मिली तो जनरेटर लगा दिया। ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों का कहना था कि जब तक क्लोअर लीफ नहीं बनेगी, तब तक हर पल हादसे का डर बना रहेगा। एसआईटी टैंकर चालक से कर रही है पूछताछ भांकरोटा अग्निकांड की जांच के लिए गठित एसआईटी गैस टैंकर के चालक जयवीर से पूछताछ कर रही है। वह हादसे के बाद जैसे ही टैंकर से गैस रिसाव हुआ भाग गया था। उसने टैंकर मालिक दिल्ली निवासी अनिल कुमार को फोन कर हादसे की जानकारी देने के बाद डर के कारण मोबाइल ​स्विच ऑफ कर लिया था। इसके बाद अपने गांव चला गया था। इसके अलावा एसआईटी अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है, जो हादसे के वक्त आस-पास मौजूद थे। हादसे के दौरान वायरल वीडियो का एनालिसिस भी कर रही है। दिल्ली आई टीम : डीसीपी अमित कुमार का कहना है कि हादसे में जख्मी लोगों को छोड़कर सभी को चिह्नित कर पूछताछ कर रहे हैं। अस्पताल में भर्ती लोगों के बयान छुट्टी के बाद लिए जाएंगे। हादसे की जांच के लिए दिल्ली से आई क्रैश लैब टीम ने मंगलवार को घटनास्थल का निरीक्षण किया और वीडियो रिकॉर्डिंग की, ताकि पता चल सके कि हादसे के पीछे रोड इंजीनियरिंग में क्या-क्या कमी रही।

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