जालंधर | यूजीसी ने दो शैक्षणिक कोर्स एक साथ करने की गाइडलाइन में बदलाव किया है। अब 5 जून 2025 से पहले दो कोर्स साथ में करने वाले छात्रों को भी मान्यता मिलेगी। इसको लेकर यूजीसी ने कॉलेजों को निर्देश भी जारी कर दिए गए है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को निर्देश भेजे हैं। इसमें कहा गया है कि यदि कोई छात्र 5 जून 2025 से पहले दो कोर्स साथ में कर चुका है और वह यूजीसी की फ़र्स्ट डिग्री और मास्टर डिग्री रेगुलेशन, संबंधित विश्वविद्यालयों के नियमों और प्रोफेशनल काउंसिल या डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो के मानकों के अनुसार किया गया है, तो उसे वैध माना जाएगा। यूजीसी ने यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया है। इसका मकसद छात्रों को लचीली और बहुविषयक शिक्षा देना है। नई गाइडलाइन के अनुसार छात्र दो फुल टाइम कोर्स फिजिकल मोड में कर सकते हैं, बशर्ते दोनों के क्लास टाइम एक-दूसरे से न टकराएं। एक फुल टाइम और एक ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग या ऑनलाइन कोर्स भी साथ में किया जा सकता है। दोनों कोर्स यूजीसी या संबंधित काउंसिल से मान्यता प्राप्त संस्थानों से होने चाहिए। यह नियम पीएचडी को छोड़कर सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों पर लागू होंगे। इसके लिए विश्वविद्यालयों से कहा गया है कि वे अपने स्तर पर नियम बनाकर छात्रों को दो कोर्स एक साथ करने की सुविधा दें। दूसरा कोर्स ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग या ऑनलाइन मोड में होगा नई गाइडलाइन का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्रों को एक साथ दो कोर्स करने की सुविधा देना है। छात्र दो फुल टाइम कोर्स फिजिकल मोड में कर सकते हैं, बशर्ते दोनों कोर्स की कक्षाओं का समय एक-दूसरे से न टकराए। एक कोर्स फुल टाइम फिजिकल मोड में और दूसरा ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग या ऑनलाइन मोड में भी किया जा सकता है। छात्र दो ओडीएल या ऑनलाइन कोर्स भी एक साथ कर सकते हैं।ओडीएल या ऑनलाइन मोड में डिग्री या डिप्लोमा केवल उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों से किया जा सकता है, जिन्हें यूजीसी, वैधानिक परिषद या भारत सरकार से मान्यता प्राप्त हो।


