दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का भव्य शुभारंभ प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ माह के प्रथम दिवस पर बुधवार को किया गया। सरगुजा जिले के उदयपुर में स्थित भारत की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात रामगढ़ में रामगढ़ महोत्सव मनाया जाता है। रामगढ़ की पहाड़ियों में महाकवि कालिदास ने खंडकाव्य मेघदूत की रचना की थी। मान्यता है कि यहां भगवान राम ने अपने वनवास काल में कुछ समय गुजारा था। अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल सहित अतिथियों ने भगवान राम के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विधायक राजेश अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे लिए खुशी की बात है कि आज रामगढ़ महोत्सव की स्वर्ण जयंती है। रामगढ़ की भव्यता को और विकसित करने यहां श्री राम मन्दिर का निर्माण किया जाएगा, जिसका भूमिपूजन भी किया गया है। ऊपर पहाड़ी पर स्थित राम मंदिर में भी सुगम व्यवस्था हेतु जल्द काम शुरू होगा। राम वनगमन पथ का हिस्सा है रामगढ़
पार्षद आलोक दुबे ने कहा कि यह वर्ष रामगढ़ महोत्सव का पचासवां साल है। रामगढ़ राम वनगमन पथ का हिस्सा है, जिन क्षेत्रों से प्रभु राम गुजरे हैं यह क्षेत्र उन्हीं में से एक है। कालिदास की महान रचना में यक्ष एवं यक्षिणी का प्रसंग यहां रामगढ़ में मिलता है, आने वाले समय में इसकी महिमा और बढ़ेगी। शोध पत्रों का किया गया वाचन
इस अवसर पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन किया गया, रामगढ़ के विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य राज्यों से आए शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया। इस अवसर पर भोपाल से आए आचार्य डॉ नीलिम्प त्रिपाठी, बनारस से डॉ शैलेष कुमार तिवारी , रायपुर के डॉ ललित शर्मा सहित अन्य शोधार्थियों ने शोधपत्रों का वाचन किया। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम
इस अवसर पर रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। लोक कलाकार श्री संजय सुरीला ने लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी। राहुल मंडल एवं टीम द्वारा भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी गई, वहीं नृत्यांगना रित्विका बनर्जी ने शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। सूर्यप्रताप शर्मा ने शिव तांडव, स्कूली छात्र- छात्राओं के द्वारा लोक नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह, महापौर मंजूषा भगत सहित जनप्रतिनिधि, जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल सहित अधिकारी एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।


