सिरोही जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर वाड़ेली गांव से होकर बहने वाली कृष्णावती नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इसके साथ ही इस नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांवों के कृषि कुएं और यहां के किसान तबाह होने की कगार पर हैं। इसकी मुख्य वजह है इस नदी में बड़े पैमाने पर दिन रात बजरी खनन हो रहा है। नदी से बजरी निकालने के लिए सरकार द्वारा बनाए गए सभी कानूनों को ताक पर रखकर खनन किया जा रहा है। जिला प्रशासन और खनन विभाग पूरे मामले पर मौन है। जिससे सिरोही जिले के कई गांवों के ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिल रहा है। आक्रोशित ग्रामीणों ने वाड़ेली, कृष्णगंज सहित मामावली, मीरपुर, वेलांगरी के नाकों पर पहुंचकर माइनिंग विभाग को मौके पर बुलाकर अवगत करवाया कि नदी में हो रहे बजरी खनन को जल्द नहीं रोका गया तो सब कुछ तबाह हो जाएगा। लोगों के सामने पेयजल की विकराल समस्या उत्पन्न हो जाएगी और खेती किसानी चौपट हो जाएगी। ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर हो रहे इस खनन को रोकने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस खनन को नहीं रोका गया तो होगा जनआंदोलन किया जाएगा। इस दौरान ग्रामीणों के साथ आए जिम्मेदारों ने बताया कि पिछले कई महीनों से नदी में मशीनों और जेसीबी की सहायता से बजरी खनन करके बड़े-बड़े ट्रक और डंपर भरकर बजरी का परिवहन किया जा रहा है। नाकों पर लगे बजरी कर्मचारियों ने कैम्पर वाहनों में ब्लैक शीशों की गाड़ियों को गैर जिम्मेदाराना तरीके से चलाते हुए सभी गांवों में ओवर स्पीड वाहन चलाकर लोगों में दहशत फैलाने का काम किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि बजरी नाकों पर बैठे कर्मचारियों के पास जब उनकी लीज आईडी मांगी गई तो उनके पास नाम मात्र अपने पर्शनल डॉक्यूमेंट ही मिल पाए। उनके पास माइनिंग अथवा लीजधारक के द्वारा दिया हुआ कोई लीगल डॉक्यूमेंट नहीं मिल पाया। जिस पर मौके पर पहुंचे माइनिंग विभाग के फोरमैन ने लीजधारक को चेतावनी देते हुए कहा कि बिना माइनिंग की परमिशन के किसी भी अनजान व्यक्ति को नाके पर नहीं बिठाया जाए। मौके पर मौजूद बिना आईडी के कर्मचारियों को तुरंत यहां से हटाया जाए। साथ ही ग्रामीणों को समझाइस करते हुए बताया कि आपकी जो लीगल मांगें हैं, जिनका दो दिन में विभाग द्वारा निस्तारण कर दिया जाएगा। वहीं लीजधारक द्वारा नियमों को ताक पर रखकर नदी में किए गए गड्ढों की जांच कर उचित कार्रवाई करने की बात कही। 1500 रॉयल्टी वसूली को लेकर भी ग्रामीणों ने जताया विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि सिरोही तहसील में लीजधारक द्वारा आमजन के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिरोही तहसील के जावाल, पाड़िव सिरोही आदि क्षेत्र में बजरी रॉयल्टी मात्र 800 रुपए वसूले जा रहे हैं। वहीं वाड़ेली सहित आस-पास गांवों में 1500 रुपए बजरी वसूली की जा रही है। ये कहां तक उचित है। खुलेआम जनता को लूटा जा रहा है, लेकिन प्रशासन मौन है। अगर हमारे यहां बजरी रॉयल्टी दर कम नहीं की गई तो ग्रामीणों द्वारा धरना प्रदर्शन कर आंदोलन छेड़ा जाएगा। जिसका सम्पूर्ण जिम्मेदार प्रशासन होगा।


