भास्कर न्यूज | सरायकेला आषाढ़ महीने में बारिश के इंतजार में आसमान की ओर आस लगाए किसानों के चेहरे बुधवार को खिले-खिले दिखे। बुधवार की सुबह से ही दिनभर रिमझिम बारिश का दौर जारी रहा। जिले में भारी बारिश को देखते हुए उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में उपायुक्त ने सभी प्रखंड के बीडीओ व सीओ को नदी के तटीय क्षेत्र की निगरानी करने का निर्देश दिया। उपायुक्त ने नदी व डैम के जलस्तर को ध्यान में रखते हुए लोगों को समय पर सूचित करने का भी निर्देश दिया। इस दौरान जिले में हुए वर्षापात के आंकड़ों के अनुसार राजनगर प्रखंड को छोड़कर जिले के शेष सभी आठ प्रखंडों में पर्याप्त वर्षा की प्राप्ति हुई है, जिसके अनुसार जिले को बुधवार के दिन कुल 651.7 मिमी वर्षा प्राप्त हुई। इसमें सर्वाधिक वर्षापात जिले के कुचाई प्रखंड में 124.2 मिमी प्राप्त हुई। इसका भूभाग के अनुसार जिले में औसत 72.4 मिमी रही। वहीं, राजनगर प्रखंड का वर्षा मापक यंत्र क्षतिग्रस्त होने के कारण वर्षापात नहीं प्राप्त किया जा सका। दिनभर बारिश के दौर के कारण एक ओर जहां आम जनजीवन अस्त व्यस्त रहा, वहीं दूसरी ओर किसान वर्ग ने इस बारिश को धान की अच्छी फसल के रूप में बताया। जागरूक किसानों के अनुसार, बारिश होते ही खेतों की मिट्टी ढीली हो जाने के कारण अब आसानी से खेत जोतने का कार्य किया जा सकेगा। आम जनजीवन अस्त व्यस्त : बुधवार की प्रातः बेला से ही दिनभर झमाझम बारिश के दौर में आम जनजीवन अस्त व्यस्त दिखा। रोजमर्रा के काम और बाजार के लिए निकले लोग बारिश से छिपते छिपाते दिखे। वहीं, बाजार क्षेत्र में भी गहमागहमी अपेक्षाकृत कम देखी गई। प्रखंडवार बुधवार को हुई वर्षा: सरायकेला- 96.0 मिमी, खरसावां- 65.0 मिमी, कुचाई- 124.2 मिमी, गम्हरिया- 62.4 मिमी, चांडिल- 80.0 मिमी, नीमडीह- 75.6 मिमी, ईचागढ़- 50.5 मिमी, कुकुडू- 98.0 मिमी । राजनगर । क्षेत्र में मानसून की दस्तक के साथ ही बुधवार को झमाझम बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। सुबह से लेकर शाम तक लगातार होती रही भारी बारिश के चलते साप्ताहिक हाट-बाजार पूरी तरह ठप रहा। व्यापारी और ग्राहक दोनों की ही मौजूदगी न के बराबर रही, जिससे आमजनों को आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में कठिनाई हुई। बारिश के कारण नदियां, तालाब और खेत लबालब भर गए हैं। कई गांवों में जलजमाव की स्थिति बन गई है। इधर, कालाझरना स्थित श्मशान घाट पर पंचायत समिति फंड से निर्मित चबूतरा भी भारी बारिश की मार नहीं सह पाया और ढह गया। दो लाख दस हजार रुपए की लागत से बना यह चबूतरा उपयोग में आने से पहले ही क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे निर्माण में घोर अनियमितता और भ्रष्टाचार की सामने आयी। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के कुछ ही दिन बाद चबूतरे में दरार आ गई थी। ग्रामीणों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सरकारी राशि की बर्बादी न हो पाए।


