मर्डर-मारपीट के मामले में 6 को आजीवन कारावास:कोर्ट की टिप्पणी- आरोपियों ने गंभीर अपराध किया, नरमी नहीं बरती जाएगी, एक आरोपी की हो चुकी मौत

सीकर की एडीजे कोर्ट संख्या-3 ने 12 साल पुराने मारपीट व हत्या के मामले में 6 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी आरोपियों पर अर्थदंड भी लगाया है। घटना के समय सात आरोपी थे जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। अपर लोक अभियोजक अनिल कुमार शर्मा व परिवादी के अधिवक्ता एडवोकेट सत्यनारायण शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया- 10 मई 2012 को शिकायतकर्ता गोरुलाल निवासी रानोली (सीकर) ने रानोली पुलिस स्टेशन में दी रिपोर्ट में बताया था कि वह 10 मई को सुबह 11 बजे अपने घर पर था। उसका घर खेत में ही बना हुआ है। उस समय आरोपी नरसी, राजपाल, ओमप्रकाश, खेताराम, शिवपाल, जितेंद्र, सुनील, मनीषा, ज्योति, कमलेश व सरोज हाथों में लाठी और सरिए लेकर आए। सभी आरोपियों ने खेत में कीकर के पेड़ के पास गोरुलाल के लड़के राजेंद्र को चारों तरफ से घेर लिया। राजेंद्र ने शोर-शराबा किया तो गोपाल, नेमीचंद, बीरबल वहां पर आ गए। आरोपियों ने लाठी और सरियों से बीरबल, राजेंद्र व नेमीचंद की पिटाई की। घटना में परिवादी के लड़के राजेंद्र के सिर में गहरी चोट लगी। वहीं गोपाल, नेमीचंद को भी चोट लगी। आरोपियों ने जमीनी विवाद के चलते उनके साथ मारपीट की थी। घटना के बाद परिजन राजेंद्र, गोपाल व नेमीचंद को रानोली अस्पताल लेकर गए। जहां से उन्हें सीकर रेफर कर दिया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान राजेंद्र की मौत हो गई। जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। यह मामला करीब 12 साल तक कोर्ट में चला। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 21 गवाह, 32 दस्तावेजी साक्ष्य और 7 आर्टिकल कोर्ट में पेश किए। जिसमें कपड़े की थैली, लोहे की पाइप, मृतक के खून आलोदा बनियान व शर्ट सबूतों के तौर पर पेश हुए। इसके बाद सबूतों, बयानों व गवाहों के आधार पर कोर्ट ने सभी 6 आरोपियों को राजपाल, नरसीराम, ओमप्रकाश, ज्योति देवी, मनीषा देवी, सरोज देवी, को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही सभी को अर्थदंड से भी दंडित किया गया। वहीं मामले में आरोपी शिवपाल की मौत हो गई थी। आज सभी आरोपियों को जज रेणुका सिंह हुड्डा ने सजा सुनाई। कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा- आरोपियों ने हत्या कर गंभीर अपराध किया है। इसलिए नरमी रुख अपनाने का कोई कारण नहीं है। सजा सुनाने के बाद सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

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