करनाल में भानू राणा गैंग के गुर्गों का खुलासा:हैंड ग्रेनेड के साथ किया था गिरफ्तार, 7 दिन के रिमांड के बाद भेजा जेल

करनाल के सेक्टर-13 से 13 जून को हैंड ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किए गए भानू राणा गैंग से जुड़े दीपेंद्र प्रताप उर्फ दीपन और अदम्य को 7 दिन के रिमांड के बाद कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। रिमांड के दौरान एसटीएफ ने दोनों से गहन पूछताछ की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने कबूला कि उन्होंने इससे पहले भी पंजाब के जालंधर में एक ग्रेनेड की सप्लाई की थी, जहां विस्फोट भी हुआ था। इस मामले में FIR दर्ज है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यह ग्रेनेड उन्हें दो अन्य युवकों ने सप्लाई किया था, जिनकी तलाश अब तेज कर दी गई है। आरोपी खुद ग्रेनेड और हथियारों को छिपाकर आगे सप्लाई करते थे, जिसका इस्तेमाल फायरिंग और फिरौती में होता था। दो और युवकों के नाम आए सामने, जल्द हो सकती है गिरफ्तारी
एसटीएफ के मुताबिक, पूछताछ में दोनों आरोपियों ने जिन दो युवकों के नाम बताए हैं, उन्हीं से यह ग्रेनेड लिया गया था। यही ग्रेनेड करनाल में पकड़े गए दोनों आरोपियों को आगे सप्लाई करना था। एसटीएफ ने अब उन दोनों युवकों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगा दी हैं। जल्द ही उन्हें भी काबू कर लिया जाएगा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सिर्फ ग्रेनेड ही नहीं, बल्कि कई बार पिस्टल और मैगजीन की भी सप्लाई कर चुके हैं। हालांकि, पुलिस के अनुसार अभी तक इन्होंने सिर्फ एक ग्रेनेड सप्लाई किया है। जालंधर में पहले भी किया था ग्रेनेड सप्लाई, हुआ था ब्लास्ट
पूछताछ में सामने आया है कि दीपेंद्र और अदम्य पहले भी एक ग्रेनेड जालंधर में पहुंचा चुके हैं, जहां बाद में उसका विस्फोट हुआ था। इस ब्लास्ट की FIR जालंधर में दर्ज है। जांच एजेंसियां अब उस केस को भी इस नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं और इस गैंग के ऑपरेशन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। एसटीएफ के मुताबिक, दोनों आरोपी पिछले 6-7 महीनों से सीधे भानू राणा से संपर्क में थे। झाड़ियों में छिपाकर रखते थे हथियार
एसटीएफ सब इंस्पेक्टर पवन कुमार ने बताया कि जब भी इन आरोपियों को कोई हथियार या ग्रेनेड सप्लाई करना होता, तो ये करनाल की अलग-अलग जगहों पर सड़क किनारे झाड़ियों में छिपा कर रखते थे। इसके बाद अपने साथियों को मोबाइल पर लोकेशन भेज देते थे। साथी वहां से हथियार उठाकर ले जाते और उसके बाद फायरिंग या धमाके जैसी वारदातें होती थीं। यह नेटवर्क पूरी तरह से स्लीपर मोड पर काम करता था। कोई क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं, फिर भी बने गैंग का हिस्सा
सबसे हैरानी की बात यह है कि इन दोनों युवकों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। लेकिन इसके बावजूद इन्होंने भानू राणा गैंग से जुड़कर हथियार सप्लाई जैसे खतरनाक कामों को अंजाम दिया। एसटीएफ के हाथ इनसे दो पिस्टल, दो मैगजीन और दो जिंदा कारतूस भी लगे हैं। ये सारी बरामदगी करनाल से ही हुई है। 13 जून को सेक्टर-13 से पकड़ा गया था ग्रेनेड के साथ
गौरतलब है कि 13 जून को एसटीएफ की टीम ने करनाल के सेक्टर-13 से दोनों युवकों दीपेंद्र प्रताप और अदम्य को उस समय दबोचा था, जब उनके पास से एक खतरनाक हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ था। सुरक्षा कारणों के चलते ग्रेनेड को तुरंत डिफ्यूज करने का फैसला लिया गया।
इंद्री रोड पर स्थित एक खाली खेत को डिफ्यूजन के लिए चुना गया, जहां बम निरोधक दस्ते ने कड़ी निगरानी और सुरक्षा के बीच ग्रेनेड को सफलतापूर्वक डिफ्यूज किया। इस दौरान तेज धमाका हुआ और विस्फोट के बाद ग्रेनेड के टुकड़े भी मौके से बरामद किए गए। यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील और जोखिमभरा था, जिसे सावधानी से अंजाम दिया गया। 14 जून को कोर्ट से 7 दिन का रिमांड, अब भेजा न्यायिक हिरासत में
14 जून को एसटीएफ ने दोनों आरोपियों को करनाल कोर्ट में पेश किया था, जहां से कोर्ट ने 7 दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया। पूछताछ के बाद 21 जून को दोबारा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब तक की जांच में ये खुलासे सबसे अहम गिरोह का नेटवर्क और गहरा होने की आशंका
पूरे मामले में एसटीएफ की जांच अब और तेज हो गई है। पुलिस को आशंका है कि करनाल और आसपास के इलाकों में हथियारों की सप्लाई के इस नेटवर्क की जड़ें और गहरी हो सकती हैं। जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों ने भी जिले में ग्रेनेड और हथियारों की तस्करी को लेकर अलर्ट जारी किया है।

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