रायपुर में ड्रग सिंडिकेट अब सोशल सर्कल में एक्टिव चेहरे तलाश रहा है। पार्टीज में जाने वाली लड़कियां, कॉलेज स्टूडेंट्स और इंस्टाग्राम स्टोरीज पर ‘कूल’ दिखने वाले प्रोफाइल टारगेट में हैं। ऐसे ही 2 लड़कियां ड्रग सिंडिकेट में फंसी, जिन्हें 10-10 साल की सजा हुई है। रायपुर NDPS कोर्ट ने पहली बार किसी लड़कियों को 10 साल की सजा सुनाई है। फैसले ने साफ किया कि ये लड़कियां सिर्फ यूजर नहीं, बल्कि सप्लाई चेन का हिस्सा थीं , ड्रग्स को आगे बढ़ाने का जरिया थी। 10 जून को रायपुर के कोर्टरूम में जब NDPS जज ने सजा सुनाई, तो नेहा भगत की आंखें नीचे झुक गईं। वहीं प्रिया स्वर्णकार के चेहरे पर अफसोस और आंखों में आंसू थे। ये वही लड़कियां थीं जो दो साल पहले पार्टीज और इंस्टाग्राम स्टोरीज में ‘कूल’ मानी जाती थीं। महंगी पार्टियों और “बोल्ड” कैप्शन वाली तस्वीरों के लिए जानी जाती थीं। ये दोनों रायपुर-गोवा और मुंबई में हाईप्रोफाइल पार्टीज ड्रग्स सप्लाई करती थी। 10 जून को दोनों लड़कियों के सामने 10 साल की जेल थी। पीछे न कोई इंस्टाग्राम स्टोरी, न कोई फॉलोअर्स की भीड़। इनके साथ इनके 3 और साथी प्रखर मारवा, मोहम्मद आवेश और अभय कुमार मिर्चे भी इसी कोर्ट रूम में थे। सभी को 10-10 साल की कैद और 1-1 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। पढ़िए इस रिपोर्ट में कैसे सिंडिकेट बना और कैसे फंसती हैं कॉलेज की लड़कियां ? जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, 25 दिसंबर 2022 को रायपुर के पंडरी थाना क्षेत्र में अम्बुजा मॉल के पास NDPS एक्ट के तहत विशेष पुलिस टीम ने रेड की थी। इस रेड में पांचों अभियुक्तों के कब्जे से प्रतिबंधित मेथामफेटामाइन (MD) की छोटी-छोटी मात्रा में कुल 7.1 ग्राम से अधिक मात्रा बरामद की गई थी। इसे इलेक्ट्रॉनिक तराजू से तोलकर पंचनामा तैयार किया गया था। मौके पर ही FSL अधिकारी ने मोबाइल पर बुलावे पर आकर परीक्षण किट से पदार्थ की जांच कर मेथामफेटामाइन होना कन्फर्म किया था। कोर्ट ने कहा कि ‘मेथामफेटामाइन’ (MD) की बरामदगी और उसका पैडलिंग नेटवर्क राज्य के लिए बेहद गंभीर चुनौती बन चुका है। सिर्फ नशा नहीं, ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा थीं दोनों प्रिया स्वर्णकार और नेहा भगत केवल नशा करने वाली नहीं थीं, बल्कि ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा थीं। इनके पास से अफीम और MD ड्रग्स की बरामदगी हुई। इस बात के प्रमाण कोर्ट में दिए गए कि उन्होंने यह पदार्थ दूसरों को देने के लिए भी रखा था। पहली बार महिला अभियुक्तों को इतनी कठोर सजा विशेष लोक अभियोजक के.के. चंद्राकर ने बताया कि NDPS एक्ट में ऐसे मामलों में 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन रायपुर कोर्ट में यह पहला मौका है, जब किसी मामले में महिला अभियुक्तों को इतनी कठोर सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा कि इससे पहले तक NDPS मामलों में इतनी लंबी सजा आमतौर पर पुरुष अभियुक्तों को ही दी जाती रही है, लेकिन इस केस में कोर्ट ने यह माना कि महिलाएं भी यदि सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हैं, तो उन्हें भी बराबर की सजा दी जानी चाहिए। कॉलेज गोइंग गर्ल्स और पार्टी में एक्टिव गर्ल्स पर टारगेट इस केस से यह बात साफ है कि ड्रग माफिया ने अपने नेटवर्क को फैलाने के लिए कॉलेज जाने वाली लड़कियों और पब या पार्टी सर्किट में एक्टिव युवतियों को निशाना बनाया। ऐसी लड़कियों को ड्रग पैडलिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इनके जरिए संदेह से बचा जा सकता है। सोशल सर्कल में ड्रग्स को तेजी से फैलाया जा सकता है। ये वो चेहरे होते हैं जिन पर आमतौर पर शक नहीं किया जाता। यही वजह है कि उन्हें ‘कूल’ सोशल इमेज और इंस्टाग्राम फ्रेंड सर्कल की आड़ में ड्रग्स के पैडलिंग नेटवर्क का हिस्सा बना दिया जाता है। सोशल लाइफस्टाइल और फ्रीडम के नाम पर लड़कियों को ड्रग्स से जोड़ा जाता है, और धीरे-धीरे उन्हें सप्लाई चेन का एक्टिव माध्यम बना दिया जाता है बिना ये एहसास कराए कि वो एक संगठित अपराध का हिस्सा बन चुकी हैं। ड्रग्स के दलदल में कैसे फंसाई जाती हैं लड़कियां? इस केस ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया, क्या लड़कियां जानबूझकर इस नेटवर्क में आईं या उन्हें लाया गया?। जवाब में ये है कि पहले दोस्ती की जाती है। लड़कों द्वारा लड़कियों से नजदीकी बढ़ाई जाती है। कभी कॉलेज में, कभी इंस्टाग्राम पर बातचीत शुरू होती है। इसके बाद रिलेशनशिप और नशे की शुरुआत होती है। रिलेशनशिप के बहाने लड़कियों को धीरे-धीरे पार्टियों में ले जाकर MD, LSD, Cocaine जैसे नशे से परिचित कराया जाता है। घर से बाहर रहने वाली लड़कियां टारगेट- अजय श्रीवास्तव संकल्प डिएडिक्शन एंड रिहेब सेंटर के सीनियर काउंसलर अजय श्रीवास्तव ने बताया कि ड्रग्स का सबसे पहला असर व्यक्ति के आत्म-संकोच और निर्णय क्षमता पर पड़ता है। नशा लेने के बाद व्यक्ति को लगता है कि वो पूरी तरह आज़ाद है। जानिए मुख्य सप्लायर प्रखर मारवा के बारे में ? प्रखर मारवा महंगी कार, महंगे क्लब्स और हाई-सोसाइटी पार्टीज से पहचाना जाने वाला चेहरा था। पुलिस के मुताबिक प्रखर हर हफ्ते मुंबई और गोवा जाता था। वहीं से ड्रग का सिंडिकेट चल रहा था। उसने 30,000 में MD खरीदी और दो पैकेट प्रिया और नेहा को दिए। उसके पास से 2.73 ग्राम MD मिला। कोर्ट में क्या-क्या प्रमाणित हुआ बड़े ड्रग माफिया पुलिस की गिरफ्त से बाहर मुंबई और गोवा से मेथामफेटामाइन (MD) सप्लाई करने वाले मुख्य स्रोत अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। NDPS कोर्ट में चले ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह स्वीकार किया कि रायपुर में पकड़े गए आरोपी केवल लोकल लेवल पर एक्टिव थे, जबकि असली सप्लायर मुंबई और गोवा जैसे शहरों में बैठे हैं। फिलहाल इन ड्रग्स का सोर्स केवल आरोपियों के बयानों और सीमित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों तक ही सीमित है, जिनके आधार पर पुलिस अब तक सप्लाई चेन के ऊपरी हिस्से तक नहीं पहुंच सकी है। इस मामले में अंतरराज्यीय कनेक्शन तो सामने आए हैं, लेकिन ड्रग्स माफिया के नेटवर्क का बड़ा हिस्सा अब भी जांच से बाहर है।


