कल-कल करता झर-झर बहता झरना, पहुंच रहे हैं नेचर प्रेमी

चाईबासा। मानसून की बारिश में प्रकृति का छिपा हुआ रंग निखर आता है। ऐसा ही मानसून का एक अनसीन साइट है, दुर्दुर कोचा। यानी पहाड़ी कंदरा से कल-कल करता बहता झरना। यह रांची-चाईबासा नेशनल हाइवे के खूंटपानी पहुंचने से ठीक पहले की पहाड़ी पर है। गांव का नाम अर्गुंडी है। आदिवासियों का गांव है। यहां सड़क के दोनों ओर बड़ी-बड़ी पहाड़ियां है। यह अलग ही प्राकृतिक नजारा है। इन दिनों इस झरने पर नेचर प्रेमी खूब पहुंच रहे हैं। लेकिन इस झरने के करीब जाना खतरा है। स्थानीय समाजसेवी और गांव से जुड़े सिंधु गागराई का कहना है कि जो भी लोग यहां आ रहे हैं, देर तक न रहें, न ही किसी प्रकार की गलत हरकत करें। यह झरना सदियों से इस मौसम में निखर कर दिखता है, जो हमारी विरासत है। यह अत्यंत सुंदर नजारा है।

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